इंदौर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ग्राम नैनोद में उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की अत्यंत महत्वाकांक्षी परियोजना, इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का भूमि-पूजन कर प्रदेश के औद्योगिक विकास को एक नई ऊंचाई प्रदान की है. यह परियोजना न केवल सड़क निर्माण तक सीमित है, बल्कि इसे आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और सुगम कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान करने वाली एक एकीकृत विकास योजना के रूप में तैयार किया गया है. मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विश्वास जताया कि यह कॉरिडोर मालवा क्षेत्र को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाएगा और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन विकास के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा.


इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (IPEC) इंदौर एयरपोर्ट के निकट सुपर कॉरिडोर से शुरू होकर धार जिले के पीथमपुर में एबी रोड तक विस्तृत होगा. लगभग 19.6 से 20.76 किलोमीटर लंबी और 250 फीट चौड़ी इस सिक्स-लेन सड़क परियोजना को औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में मिश्रित उपयोग के लिए विकसित किया जा रहा है. पूरी परियोजना की कुल लागत 2,360 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें से पहले चरण के निर्माण पर लगभग 329 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इस कॉरिडोर के निर्माण से इंदौर शहर, एयरपोर्ट और प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र पीथमपुर के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे यात्रा का समय घटकर आधा रह जाने की उम्मीद है.


इस परियोजना की एक और बड़ी विशेषता इसका अनूठा 'भूमि पूलिंग मॉडल' है, जिसमें अन्नदाताओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है. इस मॉडल के तहत किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन के बदले में 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जाएगी, जिससे वे स्वयं उद्योग स्थापित करने या अन्य विकास कार्यों में सीधे तौर पर भागीदार बन सकेंगे. यह अभिनव दृष्टिकोण न केवल किसानों का भरोसा जीतने में सहायक होगा, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाएगा. कॉरिडोर के दोनों ओर 1,000 हेक्टेयर से अधिक नियोजित क्षेत्रफल में आईटी पार्क, डेटा सेंटर, फिनटेक सिटी, स्कूल, अस्पताल और रेजिडेंशियल सोसायटियां विकसित की जाएंगी.


भविष्य की संभावनाओं की दृष्टि से यह कॉरिडोर सिंहस्थ 2028 से पहले क्षेत्र के ट्रैफिक प्रबंधन और कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार लाएगा. इसके साथ ही यह क्षेत्र दिल्ली-मुंबई, कोटा और वडोदरा जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों से बेहतर ढंग से जुड़ जाएगा. लगभग 1,290 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस नए औद्योगिक क्षेत्र से बड़े पैमाने पर वैश्विक निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे, जो पूरे मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।