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भारत सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च करने वाला दुनिया का पहला देश

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PeptechTime
22 फ़रवरी 2026, 07:05 am IST
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गांधीनगर। गुजरात राज्य में सांप के डसने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए गुजरात सरकार के पास जल्द ही राज्य में पाए जाने वाले जहरीले सांपों से ही बना एंटीवेनम उपलब्ध होगा। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में यह कदम काफी प्रभावी सिद्ध होगा।

उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार ने दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर शहर में सर्प अनुसंधान केंद्र (स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट-एसआरआई) की स्थापना की है। इस संस्थान में गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाने वाले जहरीले सांपों को लाया जाता है। अभी इस संस्थान में लगभग 460 जहरीले सांपों को रखा गया है। सांपों की देखभाल और जहर निकालने की प्रक्रिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइन का पालन किया जाता है। सांप से निकाले गए जगह को आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए प्रोसेस कर पाउडर में बदला जाता है। इस पाउडर की नीलामी कर उसे लाइसेंस वाले एंटीवेनम बनाने वाले निर्माताओं को दिया जाएगा। गुजरात सरकार निर्माताओं द्वारा पाउडर से बनाए गए एंटीवेनम को खरीदेगी और राज्य के विभिन्न हॉस्पिटलों को सर्पदंश के उपचार के लिए एंटीवेनम की आपूर्ति करेगी।


मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिए गहन उपाय किए जा रहे हैं और इसके लिए गुजरात में पाए जाने वाले जहरीले सांपों से ही प्राप्त जहर से एंटीवेनम बनाने का अहम कार्य प्रगति पर है।


सर्प अनुसंधान केंद्र ने हाल ही में गुजरात में पाए जाने वाले चार प्रमुख जहरीले सांपों की प्रजातियों- इंडियन कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर- के लायोफिलाइज्ड (पाउडर स्वरूप में) जहर की ई-नीलामी की। इस नीलामी में लाइसेंस वाले एंटीवेनम बनाने वाले निर्माताओं ने हिस्सा लिया। इस संस्थान में रखे और संभाले गए जहरीले सांपों से निकाले गए जहर की गुणवत्ता इतनी अच्छी थी कि इस जहर के लिए अनुमान से भी अधिक ऊंचे दाम मिले।


सर्प अनुसंधान केंद्र के एक उच्च अधिकारी ने इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए बताया, “इंडियन कोबरा के जहर के लिए प्रति ग्राम 40,000 रुपए का आधार मूल्य निर्धारित किया गया था, लेकिन हमें प्रति ग्राम 44,000 रुपए प्राप्त हुए। सॉ-स्केल्ड वाइपर के जहर के लिए प्रति ग्राम 50,000 रुपए के आधार मूल्य के मुकाबले हमें 56,500 रुपए मिले। दूसरी प्रजातियों के लिए भी बेहतर प्रतिक्रिया के साथ ऊंचे दाम मिले।”


सर्प अनुसंधान केंद्र के उपाध्यक्ष डॉ. डी.सी. पटेल ने कहा, “सर्पदंश के उपचार में मुख्य चुनौती अलग-अलग क्षेत्र के हिसाब से सांप के जहर का बदल जाना है। कई बार दूर-सूदुर क्षेत्र से लाए गए जहर से बनाया गया एंटीवेनम कम प्रभावी सिद्ध होता है। इस समस्या के समाधान के लिए गुजरात सरकार ने सर्प अनुसंधान केंद्र की स्थापना की है और यहां गुजरात में पाए जाने वाले जहरीले सांप की प्रजातियों से जहर एकत्रित कर एंटीवेनम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। हमें उम्मीद है कि गुजरात में पकड़े गए सांप के जहर से बने एंटीवेनम सर्पदंश के उपचार में और अधिक कारगर साबित होंगे।”


डॉ. डी.सी. पटेल एक जनरल सर्जन हैं, और सर्पदंश के उपचार में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वे धरमपुर में एक हॉस्पिटल चलाते हैं और सर्पदंश पीड़ितों का उपचार करते हैं। सर्पदंश के उपचार में उनकी सफलता की दर 98 फीसदी से अधिक है। उन्होंने पिछले 35 वर्षों के दौरान सांप के डसने के हर केस का दस्तावेजीकरण भी किया है।


डॉ. पटेल ने आगे कहा, “यहां रखे गए सांपों से प्राप्त किया गया जहर उच्च गुणवत्ता वाला है, क्योंकि हमारा संस्थान डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों का अनुसरण करता है। संस्थान द्वारा मुहैया कराए गए जहर से तैयार एंटीवेनम उपलब्ध होने से राज्य में सांप के डसने से होने वाली मौतों में कमी आने की आशा है।”


सर्प अनुसंधान केंद्र (एसआरआई), गांधीनगर स्थित गुजरात फॉरेस्ट्री रिसर्च फाउंडेशन (जीएफआरएफ) के अधीन कार्य करता है। वहीं, जीएफआरएफ, गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है। सर्प अनुसंधान केंद्र राज्य में सांप के डसने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए अनुसंधान, प्रशिक्षण और जनजागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करता है।


सर्प अनुसंधान केंद्र को आगामी समय में विश्व स्तरीय संस्थान बनाने की योजना बनाई जा चुकी है। वलसाड जिला कलेक्टर ने इस संस्थान के स्थायी परिसर के निर्माण और उससे संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए 2.25 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। इस संस्थान को विश्व स्तरीय केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए 11.68 करोड़ रुपए का प्रस्ताव गुजरात सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।


देश में एंटीवेनम बनाने के लिए सांप से जहर निकालने का काम अभी तमिलनाडु स्थित इरुला स्नेक कैचर्स इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसायटी लि. करती है। धरमपुर स्थित सर्प अनुसंधान केंद्र अब इस कार्य को करने वाला देश का दूसरा संस्थान बन गया है।


भारत सर्पदंश एन्वेनोमिंग के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में ‘नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एन्वेनोमिंग (एनएपी-एसई)’ यानी सर्पदंश से फैलने वाले जहर की रोकथाम और नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च की। यह व्यापक फ्रेमवर्क राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी कार्य योजना बनाने के लिए मार्गदर्शन देता है। इसका मुख्य उद्देश्य 2030 तक सांप के डसने से होने वाली मौतों और दिव्यांगता को 50 फीसदी तक कम करना है। गुजरात का सर्प अनुसंधान केंद्र इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


सर्प अनुसंधान केंद्र लोगों में सर्पदंश के बारे में जागरूकता फैलाने का काम भी करता है। अब तक लगभग 300 से अधिक स्थानीय स्नेक रेस्क्यूअर्स (सांप बचावकर्मी) और 23 जिलों में 1495 से अधिक डॉक्टरों एवं मेडिकल ऑफिसरों को सर्पदंश प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये प्रयास, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल प्रतिक्रिया एवं उपचार के परिणामों में सुधार लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।


सर्प अनुसंधान केंद्र (धरमपुर) जागरूकता कार्यक्रम चलाता है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देता है और स्थानीय पंचायतों के साथ मिलकर सांप से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने तथा सुरक्षित तरीकों को बढ़ावा देने का काम करता है। संस्थान ने ‘स्नेक्स ऑफ वलसाड’ नामक फोटोग्राफिक फील्ड गाइड प्रकाशित की है और इस संदर्भ में एक वृत्तचित्र भी तैयार किया है।

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