रीवा। रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल से सामने आए आंकड़े विंध्य क्षेत्र में कैंसर के बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में यहां 5116 लोगों में कैंसर की पुष्टि हुई है, जिनमें से 4885 मरीजों ने अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मरीज बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख कर लेते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले ओरल कैंसर के सामने आ रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह तंबाकू, गुटखा और बीड़ी का अत्यधिक सेवन है। इसके अलावा बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड और मोटापे के कारण ब्रेस्ट, ओवरी और सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भी तेजी आई है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मरीज तीसरी या चौथी स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का इलाज लंबा चलता है और कई मामलों में 5 साल तक नियमित फॉलोअप की जरूरत होती है। यदि समय पर जांच और इलाज शुरू किया जाए, तो मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए अचानक वजन कम होना, लगातार थकान, शरीर में गांठ, असामान्य रक्तस्राव या लंबे समय तक घाव न भरने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत जांच कराएं और जागरूकता बढ़ाएं। समय पर पहचान, नियमित स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।