नेपीडॉ, 2 मई । चीन की हाल की पनडुब्बी ड्रोन गतिविधियां इंडोनेशिया के लोम्बोक स्ट्रेट में सिर्फ एक 'तकनीकी जिज्ञासा' नहीं हैं, बल्कि यह 'छिपी हुई महत्वाकांक्षा' का संकेत हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की लगातार निगरानी और नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को अस्थिर कर सकती हैं, जिससे पड़ोसी देशों के बीच भरोसा कम होगा और रणनीतिक समुद्री इलाकों में तनाव बढ़ सकता है।
म्यांमार के मीडिया आउटलेट ‘मिजिमा न्यूज’ के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन गतिविधियों को 'सोची-समझी चाल' के रूप में देखना चाहिए, जिसका मकसद प्रभाव बढ़ाना है, वो भी संप्रभुता, भरोसे और शांति की कीमत पर।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोम्बोक स्ट्रेट में चीन का अंडरवॉटर ड्रोन मिलना या पकड़ा जाना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह समुद्र के नीचे चल रही गुप्त निगरानी की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है।
लोम्बोक स्ट्रेट प्रशांत महासागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाले कुछ गहरे समुद्री रास्तों में से एक है। यह जहाजों के व्यापार और पनडुब्बी संचालन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे संवेदनशील इलाके में अंडरवॉटर ड्रोन भेजकर चीन यह संकेत दे रहा है कि वह समुद्री रास्तों की निगरानी, नक्शा तैयार करने और जरूरत पड़ने पर उन पर नियंत्रण तक की क्षमता और इरादा रखता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी सरकार एक 'बहु-स्तरीय रणनीति' के तहत अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इन ड्रोन का मकसद समुद्री जानकारी इकट्ठा करना है, जैसे समुद्र की गहराई का डेटा, नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखना और पड़ोसी देशों की रक्षा कमजोरियों को समझना।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे गुप्त तरीके से दूसरे देशों के समुद्री क्षेत्र में निगरानी करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और संप्रभुता का उल्लंघन है। इसे 'रक्षात्मक' नहीं बल्कि 'आक्रामक' कदम बताया गया है, जिसका उद्देश्य बिना खुले टकराव के डर और दबाव बनाना है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि चीन कई बार इन गतिविधियों से इनकार करता है, भले ही कुछ मामलों में इसके संबंध राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियों से जुड़े पाए जाते हैं, जैसे चाइना शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन। इससे भरोसा और भी कमजोर होता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जहां चीन चुपचाप अपनी पकड़ मजबूत करता है और बाद में कूटनीतिक विरोधों को पीछे छोड़ देता है। चाहे दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप बनाना हो या इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में ड्रोन भेजना, यह तरीका पहले 'हकीकत बना लेने' और फिर बातचीत होने देने जैसा है।

