ब्रसेल्स वार्ता सफल हुई तो भारतीय आर्थिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय होगा

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नया साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक मोड़ लेकर आया है, जहाँ 8 और 9 जनवरी की तारीखें देश के व्यापारिक भविष्य की दिशा तय करने वाली साबित होंगी। ऐसे समय में जब अमेरिकी प्रशासन की ओर से बार-बार बढ़ते टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकियां मिल रही हैं, भारत अपने विकल्पों का विस्तार करते हुए यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी में है। यदि ब्रसेल्स में होने वाली यह मंत्रिस्तरीय वार्ता सफल रहती है, तो यह भारतीय आर्थिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय होगा, जो न केवल निर्यात को बढ़ावा देगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की व्यापारिक साख को भी मजबूत करेगा।
इस महत्वपूर्ण वार्ता के लिए भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल दो दिवसीय यात्रा पर ब्रसेल्स जा रहे हैं, जहाँ वे यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा मामलों के आयुक्त मारोस सेफ्कोविच के साथ गहन चर्चा करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की राह में आ रही बाधाओं को दूर करना और लंबित मुद्दों पर रणनीतिक सहमति बनाना है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच बढ़ते राजनयिक और तकनीकी संबंधों को दर्शाती है और समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। भारत का लक्ष्य एक ऐसा महत्वाकांक्षी और संतुलित समझौता करना है, जिससे दोनों पक्षों के आर्थिक हितों की रक्षा हो सके।
हालांकि, इस समझौते की राह में कुछ प्रमुख तकनीकी और नीतिगत चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। सबसे बड़ी अड़चन कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म को लेकर है, जिसे यूरोपीय संघ ने हाल ही में प्रभावी किया है। इस नियम के तहत यूरोप उन उत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाएगा जिनके उत्पादन में अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है, जैसे स्टील और एल्युमीनियम। यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिस पर भारत स्पष्टता और रियायत चाहता है। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ ऑटोमोबाइल, वाइन, स्पिरिट और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना रहा है, जबकि भारत अपने कृषि क्षेत्र और स्थानीय उत्पादकों के हितों को देखते हुए टैरिफ संरचना में सावधानी बरत रहा है।
इन चुनौतियों के बावजूद, यदि यह समझौता धरातल पर उतरता है, तो भारत को इसके दूरगामी लाभ मिलेंगे। मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 26 देशों के विशाल बाजार तक बिना किसी टैरिफ बाधा के पहुंच प्राप्त होगी। वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 120 अरब डॉलर का है, जिसमें भारत व्यापार अधिशेष की स्थिति में है। इस समझौते से भारत के कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा, जिससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में, यूरोपीय संघ के साथ एक मजबूत व्यापारिक गठबंधन भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
