आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीसरे दिन सुनवाई

‘दुर्भाग्यपूर्ण है… हमें समय बर्बाद करना पड़ रहा है’, आवारा कुत्तों के मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से इस विषय में दखल न देने की अपील की।
ACGS (ऑल क्रिएचर्स ग्रेट एंड स्मॉल) नामक संस्था की तरफ से दलील रखते हुए सिंघवी ने कहा कि आवारा कुत्तों से संबंधित कानून और नियम पहले से ही मौजूद हैं। ऐसे में अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब संसद ने जानबूझकर इस विषय में हस्तक्षेप नहीं किया है, तो न्यायपालिका को भी इससे दूरी बनाए रखनी चाहिए।
सिंघवी ने एमीकस क्यूरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एमीकस क्यूरी कानून के सलाहकार होते हैं, लेकिन वे किसी विशेष विषय के विशेषज्ञ नहीं होते। इस तरह के मामलों में पशु कल्याण, पर्यावरण और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों के डोमेन एक्सपर्ट्स को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि फैसले व्यावहारिक और संतुलित हों।
उन्होंने अरावली पहाड़ियों से जुड़े मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पहले गठित समिति में अधिकांश सदस्य अफसर थे, न कि विषय विशेषज्ञ। इसी कारण उस फैसले पर बाद में पुनर्विचार करना पड़ा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों को लेकर फैसला सुनाया था, जिसमें 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही ‘अरावली हिल्स’ माना गया था। बाद में 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने अपने ही फैसले पर रोक लगाते हुए कहा था कि अंतिम निर्णय से पहले विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी है।
