मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और प्रस्तावित कार सेवा को लेकर शुक्रवार को धर्मनगरी वृंदावन में संत समाज की महाबैठक आयोजित की गई। मोहिनी शरण महाराज के आश्रम में हुई इस बैठक में विभिन्न अखाड़ों, पीठों और धार्मिक संगठनों से जुड़े साधु-संतों ने भाग लिया। बैठक में आंदोलन की रणनीति पर चर्चा करते हुए संत समाज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए चलाए जा रहे अभियान को पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया। साथ ही, 9 अगस्त को होने वाले शिला पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।बैठक में धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़, चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज, महा निर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. सत्यानंद सरस्वती सहित कई वरिष्ठ संत, महामंडलेश्वर और धार्मिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। संतों ने सर्वसम्मति से स्वामी सच्चिदानंद महाराज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण के लिए ब्रज का संत समाज पूरी तरह एकजुट है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 अगस्त को सभी साधु-संत और श्रद्धालु चित्रगुप्त पीठ आश्रम में एकत्रित होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे यज्ञ से होगी, इसके बाद 11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य शिला पूजन किया जाएगा और दोपहर 12 बजे शंखनाद कर आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी। संतों ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए विशेष शिलाएं तैयार कराई जा रही हैं, जिन पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की आकर्षक नक्काशी की जाएगी। शिला पूजन के बाद इन्हीं शिलाओं पर कार्यशाला में नक्काशी का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।

धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने आईएएनएस को बताया कि चित्रगुप्त पीठाधीश्वर द्वारा लिया गया संकल्प पूरे संत समाज को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अखाड़ा परिषद, विभिन्न अखाड़ों, द्वारों, संतों, भागवताचार्यों, विद्वानों, ब्रजवासियों और देशभर के कृष्ण भक्तों का समर्थन इस अभियान को लगातार मजबूत करेगा। धर्म रक्षा संघ प्रारंभ से ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए प्रयासरत रहा है और अब यह संकल्प एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है। जब भविष्य में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनेगा, तब आज का यह संकल्प इतिहास का हिस्सा माना जाएगा।

चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि ललित कुंज आश्रम में आयोजित बैठक में सभी संतों का आशीर्वाद और समर्थन प्राप्त हुआ। 9 अगस्त के कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार ही आयोजित होंगे। शिला पूजन के बाद मंदिर निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थरों की नक्काशी के लिए कार्यशाला स्थापित की जाएगी, जहां भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का चित्रण स्तंभों और अन्य शिलाओं पर किया जाएगा।कि आगे भी संत समाज की बैठक होगी, जिसमें बाल लीलाओं के चित्रण के अंतिम स्वरूप पर विचार किया जाएगा।

स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि कार्यक्रम में कितने श्रद्धालु शामिल होंगे, इसका अनुमान लगाना कठिन है क्योंकि यह पूरी तरह कृष्ण भक्तों की आस्था से जुड़ा आयोजन है। श्रावण मास को देखते हुए मुख्य कार सेवा की तिथि बाद में तय की जाएगी। अखाड़ा परिषद की ओर से भी श्रावण मास के बाद मुख्य कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया गया है, इसलिए फिलहाल शिला पूजन और संबंधित कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान या संतों के खिलाफ किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई या नोटिस जारी किया जाता है, तो संत समाज उसका विरोध करेगा। यह अभियान भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली की मुक्ति की मांग से जुड़ा है और इसे लेकर संत समाज पीछे हटने वाला नहीं है।

महा निर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. सत्यानंद सरस्वती ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के भव्य एवं दिव्य मंदिर निर्माण की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए व्यापक जनजागरण हुआ था, उसी तरह श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए भी समाज में व्यापक जागरूकता लाने की आवश्यकता है। संत समाज घर-घर जाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करेगा ताकि सनातन समाज की एकजुटता और अधिक मजबूत हो सके।

उन्होंने आगे कहा कि 9 अगस्त को शिला पूजन, यज्ञ और हवन का आयोजन संत समाज की एकता का प्रतीक होगा। एकजुटता ही किसी भी बड़े उद्देश्य की सफलता का आधार होती है। उन्होंने लोगों से शांति और संगठन के साथ इस अभियान में भाग लेने का आह्वान किया, साथ ही कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन को आगे भी तेज किया जाएगा।

बैठक के अंत में उपस्थित संतों ने एक स्वर में कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से ब्रज का संत समाज पूरी तरह संगठित है और आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक रूप दिया जाएगा।