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रविदास जयंती की छुट्टी होने से पहली बार रविवार को पेश हो सकता है आम बजट

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7 जनवरी 2026, 09:10 am IST
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केंद्र की मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार का बजट कई मायनों में ऐतिहासिक और अनूठा हो सकता है, क्योंकि संभावना जताई जा रही है कि बजट 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद उसी दिन पेश किया जाएगा। हाल के वर्षों में यह पहली बार होगा जब साप्ताहिक अवकाश के दिन संसद की कार्यवाही बजट के लिए आयोजित की जा सकती है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आगामी बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ होने की उम्मीद है।


परंपरा के अनुसार, साल 2017 से केंद्र सरकार हर साल 1 फरवरी को सुबह 11 बजे बजट पेश करती आ रही है। इससे पहले बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस को पेश किया जाता था, लेकिन तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस औपनिवेशिक परंपरा को बदलते हुए इसे महीने की शुरुआत में स्थानांतरित कर दिया था। इस वर्ष 1 फरवरी को रविवार के साथ-साथ गुरु रविदास जयंती भी है। सामान्यतः रविवार को सरकारी कार्यालय और शेयर बाजार बंद रहते हैं, लेकिन बजट की महत्ता को देखते हुए सरकार इस परंपरा को जारी रख सकती है। इससे पहले भी विशेष परिस्थितियों में शनिवार को बजट पेश किया जा चुका है। उदाहरण के तौर पर, साल 2025 में भी 1 फरवरी को शनिवार था और उस दिन अंतरिम बजट पेश किया गया था। इतिहास में पीछे जाएं तो 1999 में भी शनिवार को बजट पेश हुआ था, जब बजट के समय को शाम 5 बजे से बदलकर सुबह 11 बजे किया गया था।


बजट सत्र के प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को सदन के पटल पर रखा जा सकता है। इसके बाद 30 और 31 जनवरी के अवकाश के बाद सीधे 1 फरवरी को मुख्य बजट भाषण होने की संभावना है। यह बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा सकता है, जिसमें पहला चरण लगभग तीन सप्ताह और दूसरा चरण चार सप्ताह तक चलने की उम्मीद है। बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण का मुख्य विषय रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म (सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन) रहने की चर्चा है, जिसके आधार पर विभिन्न मंत्रालयों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।


2026-27 का यह बजट वैश्विक उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नीतियों में बदलाव की आशंकाओं के बीच आ रहा है। दुनिया भर में बढ़ते टैरिफ और कूटनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार का लक्ष्य आर्थिक सुधारों के जरिए देश की विकास दर को स्थिर और तेज बनाए रखना है। इस बजट की मुख्य थीम सरकार के विकसित भारत के लक्ष्य पर आधारित होगी। सरकार का प्रयास है कि औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को समाप्त कर भारतीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाया जाए। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए पांच प्रण की झलक भी इस बजट प्रस्तावों में दिखने की उम्मीद है। यद्यपि रविवार को बजट पेश करने का अंतिम निर्णय संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा लिया जाएगा, लेकिन सरकार के संकेतों से स्पष्ट है कि वे 1 फरवरी की तिथि के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते।

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