पूर्व मंत्री बोले- मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग में बिग बॉस की तरह है नौशाद...?

Advertisement
भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने आज एक सनसनीखेज प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रदेश के जल संसाधन विभाग और पीएचई में फैले कमीशनराज पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विभाग में सक्रिय एक कथित बिचौलिया तंत्र की तुलना बिग बॉस से करते हुए मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री से कई कड़े सवाल पूछे हैं। श्री नायक ने कहा कि हमारे प्रदेश में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए जल निगम और पीएचई ने सबसे ज्यादा धनराशि आवंटित की है, लेकिन इसमें जिस निर्ममता से भ्रष्टाचार हुआ है, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
मुकेश नायक ने भ्रष्टाचार के इस खेल को फिल्मी और रहस्यमयी अंदाज में बयां करते हुए कहा कि अभी तक हमने सुना था कि फिल्मों में एक ही व्यक्ति चोर, विलेन या हीरो का अभिनय कर लेता है, लेकिन यह पहली बार है जब एक ही सिंडिकेट अलग-अलग कंपनियों के नाम से आपसी तालमेल कर सारे ठेके हड़प रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर एक नाम उछालते हुए पूछा कि आखिर "यह नौशाद कौन है?" जिसे पूरा डिपार्टमेंट सौंप दिया गया है। श्री नायक के अनुसार, नौशाद विभाग में एक ऐसी अदृश्य शक्ति बन चुका है जो बिग बॉस की तरह है; जिसकी आवाज़ तो सबको सुनाई देती है, लेकिन वह दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नौशाद के इशारे के विभाग में एक पत्ता भी नहीं हिलता, इसलिए मंत्री तुलसी सिलावट को नौशाद से अपने रिश्तों को सार्वजनिक करना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने मोंटेना कंपनी और राजीव मोंटेना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह वही कंपनी है जिसे कमलनाथ सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया था, फिर आखिर मुख्यमंत्री और मंत्री जी का इस कंपनी से क्या प्रेम है? श्री नायक ने मांग की कि यदि मुख्यमंत्री इस भ्रष्टाचार की हिस्सेदारी में शामिल नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल इसकी CBI जांच करानी चाहिए ताकि जनता को पता चल सके कि यह नौशाद कौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ साल से विभाग में बड़े टेंडर इसलिए नहीं लग रहे हैं क्योंकि कमीशन का हिसाब पूरा नहीं हो पा रहा है। खरगोन, अलीराजपुर, झाबुआ, रीवा और मंदसौर जैसे जिलों के बड़े प्रोजेक्ट्स में केवल चुनिंदा कंपनियां ही क्यों शामिल होती हैं, क्या टेंडर की शर्तें जानबूझकर ऐसी बनाई गई हैं कि बाकी कंपनियां केवल औपचारिकता बनकर रह जाएं?
विभाग की तकनीकी खामियों पर सवाल उठाते हुए मुकेश नायक ने पूछा कि डीआई पाइप की जगह अन्य घटिया पाइप क्यों बिछाए गए हैं? उन्होंने दावा किया कि प्रभावशाली बिचौलिया तंत्र विभागीय और उच्च स्तर पर फिक्स टेंडर मॉडल और परसेंटेज राज चला रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि 300 करोड़ रुपये से अधिक के सभी टेंडरों की न्यायिक या SIT द्वारा निष्पक्ष जांच हो और पिछले डेढ़ साल की पारदर्शिता स्पष्ट करने के लिए सरकार श्वेतपत्र जारी करे। साथ ही, सभी चालू परियोजनाओं का स्वतंत्र एजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट और भुगतान श्रृंखला की फोरेंसिक वित्तीय जांच कराई जाए। नायक ने चेतावनी दी है कि यदि उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो वे भ्रष्टाचार से संबंधित सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक कर देंगे।


