भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन स्तर पर एक बड़े और क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घोषणा की है कि आने वाले समय में आरक्षित सीटों पर किसी बड़े नेता की 'पत्नी, मां या बहन' को टिकट नहीं दिया जाएगा। इसकी जगह पार्टी उन महिला कार्यकर्ताओं को मौका देगी जो जमीन पर रहकर महिला कांग्रेस के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह कदम आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों में 'परिवारवाद' के आरोपों को खत्म करने और असली महिला नेतृत्व को उभरने का अवसर देने के लिए उठाया गया है।


महिला कांग्रेस की बैठक में जीतू पटवारी की दो टूक

भोपाल में आयोजित महिला कांग्रेस की विशेष बैठक को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने यह बड़ा एलान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब तक यह आरोप लगता रहा है कि जब भी कोई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होती है, तो कद्दावर नेता अपने ही परिवार की महिलाओं को टिकट दिला देते हैं। पटवारी ने सख्त लहजे में कहा, "अब ऐसा नहीं चलेगा। यदि मेरे परिवार की भी किसी महिला को चुनाव लड़ना है, तो उन्हें पहले महिला कांग्रेस में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम करना होगा। टिकट का पहला हक उन्हीं का होगा जो संगठन के लिए पसीना बहा रही हैं।"


पॉलिटिकल अफेयर कमेटी में रखा जाएगा प्रस्ताव

जीतू पटवारी ने जानकारी दी कि इस बड़े बदलाव के लिए जल्द ही एक आधिकारिक प्रस्ताव 'पॉलिटिकल अफेयर कमेटी' (PAC) के समक्ष रखा जाएगा। एक बार कमेटी की मुहर लगने के बाद यह कांग्रेस की चयन प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बन जाएगा। माना जा रहा है कि देश में लागू होने वाले 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण) को देखते हुए कांग्रेस ने यह रणनीतिक तैयारी की है ताकि भविष्य में पार्टी के पास अपना एक मजबूत महिला कैडर तैयार रहे।


कार्यकर्ताओं में उत्साह, 'डमी उम्मीदवारों' पर लगेगी रोक

पार्टी के इस फैसले को 'डमी उम्मीदवारों' की परंपरा को खत्म करने की दिशा में एक साहसी कदम माना जा रहा है। अक्सर देखा गया है कि चुनाव जीतकर आने वाली महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज को उनके पति या पिता संभालते हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस नई व्यवस्था से उन महिलाओं को आगे आने का मौका मिलेगा जो वास्तव में राजनीति में सक्रिय हैं और सामाजिक मुद्दों की समझ रखती हैं।


जीतू पटवारी के इस एलान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहाँ महिला कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं उन दिग्गज नेताओं के लिए यह एक बड़ा झटका है जो अपने परिवार के राजनीतिक दबदबे को बनाए रखने के लिए घर की महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारते रहे हैं।