आस्था जरूरी, गंदा पानी पीना मजबूरी...!
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अजयगढ़, मो. मुस्तकीम। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई दुखद घटना के बाद मध्य प्रदेश सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रदेश में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों को जल स्रोतों की बारीकी से निगरानी रखने को कहा गया है।
इसी कड़ी में सागर कमिश्नर ने संभाग के समस्त कलेक्टरों और नगरीय निकाय अधिकारियों को कड़े आदेश जारी किए हैं। उन्होंने निर्देशित किया है कि पाइपलाइन सप्लाई, जलाशयों की स्वच्छता और क्लोरिनेशन पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि लोगों को संक्रमण मुक्त और स्वच्छ पानी मिल सके। लेकिन क्या जमीन पर इन आदेशों का पालन हो रहा है?
आदेश के परिप्रेक्ष्य में पन्ना के अजयगढ़ से हमारी यह ग्राउंड रिपोर्ट...
पन्ना जिले का ऐतिहासिक अजयगढ़ किला, जहाँ आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर विशाल मेला लगने वाला है। इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु ऊँची पहाड़ी पर स्थित भगवान अजयपाल के दर्शन करने पहुँचेंगे। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु भगवान को शुद्ध घी से बने पकवानों का भोग लगाते हैं और स्वयं भी वही प्रसाद ग्रहण करते हैं। विडंबना यह है कि ऊँची पहाड़ी पर स्थित इन लाखों लोगों के स्नान और भोजन बनाने के लिए पानी का एकमात्र स्रोत वहाँ स्थित प्राचीन तालाब ही है।
जिस तालाब के पानी पर लाखों लोगों की सेहत निर्भर है, वहाँ वर्तमान में गंदगी का अंबार लगा है। काई जमने के कारण पूरे तालाब का पानी हरा हो चुका है। कुछ श्रद्धालु अभी से इसी दूषित पानी का उपयोग भोजन और प्रसाद बनाने में कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी आस्था अटूट है, लेकिन इस गंदे पानी को पीना उनकी मजबूरी बन गया है। ग्रामीणों ने दूषित पानी का नमूना अधिकारियों को भी दिखाया है, लेकिन समाधान अब तक सिफर है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ पुरातत्व विभाग के अधिकारी स्पष्ट कह रहे हैं कि किले के तालाब का पानी पीने योग्य नहीं है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर संजीदा नजर नहीं आ रहा। अजयगढ़ एसडीएम पत्राचार की बात कहकर पल्ला झाड़ते दिखाई दे रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि यदि प्रशासन समय रहते इस पानी को स्वच्छ बनाने या वैकल्पिक व्यवस्था करने में विफल रहता है, तो लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या प्रशासन इंदौर जैसी किसी बड़ी घटना के इंतजार में है? फिलहाल, अजयगढ़ किले के तालाब का दूषित पानी आने वाले खतरे की दस्तक दे रहा है, जिसकी सुध लेना अनिवार्य है।
