Tuesday, February 24, 2026

LOGO

BREAKING NEWS
विचारभारत मण्डम् में प्रदर्शन और कांग्रेसी सोच

भारत मण्डम् में प्रदर्शन और कांग्रेसी सोच

Post Media

File Photo

News Logo
PeptechTime
22 फ़रवरी 2026, 07:22 am IST
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter/XOpen Instagram
Copy Link

Advertisement

एआई समिट को लेकर समूची दुनिया में भारत की पहल की सराहना हो रही है। अत्याधुनिक अविष्कारों से विकसित हुई आशायें नित नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहीं है। मानवीय क्षमताओं में हो रही इस बढोत्तरी को सकारात्मक दिशा में ले जाने की आवश्यकता है। प्रत्येक कारक के धनात्मक और नकारात्मक दो पक्ष होते हैं। अच्छे प्रयासों को आगे बढाने के लिए अवरोधों, समस्याओं और कठिनाइयों को रोकना पडता है। इन्हीं चिन्ताओं को दूर करने तथा भविष्य को स्वर्णिम बनाने हेतु समिट में योजनायें तैयार की गयी हैं। संसार को सुरक्षित रखते हुए विकास को पंख देने का काम मां भारती की गोद में हुआ है। इससे न केवल देश की साख को चार चांद लगे बल्कि दुनिया को दिशा देने वाले राष्ट्रों की श्रंखला में ऊंची छलांग भी लगी है। इसी समिट के दौरान कांग्रेस पार्टी ने देश की छवि खराब करने की मंशा से भारत मंडपम् में अभद्र प्रदर्शन ही नहीं किया बल्कि देश के प्रधानमंत्री के विरोध में नारेबाजी भी की। कपडे उतारे और आक्रामकता भी दिखाई। देश का प्रधानमंत्री राष्ट्र का व्यवस्था प्रमुख माना जाता है। इस तरह की हरकत राष्ट्र के माथे पर कलंक के टीके की तरह स्थापित हो गई है। सत्ता के कई विपक्षी दलों ने सरकार का समर्थन करते हुए कांग्रेस के इस राष्ट्रविरोधी कृत्य की मुक्त कंठ से भर्त्सना की है। अनेक गैर राजनैतिक संगठनों ने इस कृत्य की कडे शब्दों में निंदा करते हुए कांग्रेस के वंशवादी नेता राहुल गांधी से माफी मांगने तक की बात कही है। अतीत गवाह है कि राष्ट्र की प्रत्येक उपलब्धि पर सबूत मांगने, सेना को हतोत्साहित करने, आतंकवादियों को समर्थन देने, उपद्रवियों को मासूम बताने, भारत के टुकडे-टुकडे करने की ख्वाइश रखने वालों का पक्ष लेने जैसे अनेक कृत्यों में कांग्रेस ने हमेशा से ही सक्रिय भागीदारी दर्ज की है। धर्म के नाम पर देश के बटवारे, अल्पसंख्यक के नाम पर अयोग्य लोगों की भर्ती, सम्प्रदाय के नाम पर नसबंदी, उपासना पद्धति के नाम पर सरकारी कब्जे, श्रद्धा की सम्पत्ति पर पक्षपातपूर्ण व्यवस्था जैसे अनेक उदाहरण कांग्रेस काल की सत्ता को एक पक्ष के लिए दमनकारी तो दूसरे के लिए समर्थनकारी के रूप में परिभाषित करते हैं। विदेश दौरों पर राष्ट्र को कोसने वाले वंशवादी कांग्रसी नेता ने हमेशा ही राष्ट्रीय विकास, उपलब्धियों के प्रचार और शान्ति के प्रयासों पर नकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास किया। चुनावी पराजय की बौखलाहट में राष्ट्रहितों को मौथला करने के प्रयासों को गति देकर पार्टी की आक्रामकता दिखाना अब कांग्रेस के लिए ही आत्मघाती कदम साबित हो रहा है। वर्तमान नीतियों-रीतियों, आदर्श-सिद्धान्त और नेतृत्व-कृतत्व से राष्ट्र की छवि को खराब करने के प्रयास करने वाले केवल और केवल स्वार्थ सिद्धि, सम्मान सिद्धि और सत्ता सिद्धि के लक्ष्य भेदन हेतु कुछ भी करने के लिए संकल्पित प्रतीत हो रहे हैं। जहां संसद की गरिमा को प्रत्येक सत्र में तार-तार होने के कीर्तमान गढने वाले दल अपनी कलुषित मानसिकता को प्रदर्शित कर रहे हैं वहीं अब विदेशों के ख्यातिलब्ध प्रतिनिधियों के साथ मिलकर किये जा रहे सार्थक प्रयासों पर भी कालिख पोतने का काम शुरू हो गया है। सात समुन्दर पार जाकर मनगढन्त आंकडों के आधार पर देश को पतनोन्मुखी बताने वाले आर्थिक उन्नति के विश्व व्यापी आख्याओं तक को नजरंदाज कर रहे हैं। देश के लिए खाई खोदने वाले विदेशियों से दलबहियां करने, शत्रुता की मानसिकता वाले राष्ट्रों के साथ निजी आर्थिक संबंध बनाने, पौराणिक संस्कृतियों के अस्तित्व को नकारने, चुनावी काल में बहुरूपियों की तरह धार्मिक श्रंगार करने, निजी जीवन में सनातन को झुठलाने जैसे अनेक व्यवहारिक उदाहरणों से वास्तविकता का स्वतः ही बोध हो जाता है। भारत मण्डम् की घटना और उससे उचित ठहराने की ढीठता से कांग्रेस एक बार फिर समूचे देश में निंदा का शिकार हो रही है। उसकी सर्वत्र भर्त्सना हो रही है। आक्रोशित लोगों तथा कांग्रेस के चन्द सिपाहसालारों के मध्य झडपें होने लगीं हैं जिसे आने वाले अशान्ति की दस्तक के रूप में देखने वालों की ही कमी नहीं है। निजी हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस का दमन थामने वाले चन्द लोग ही इस तरह के कृत्यों में शामिल दिखाई दे रहे हैं। मंच, माला, माइक के भूखे लोगों के अपने स्वार्थ हैं जो राजनैतिक दल के छाते के तले निरंतर फल फूल रहे हैं। इन्हीं लोगों की चाटुकारिता की दम पर वंशवादी राजनीति अस्तित्व में बनी हुई है अन्यथा आम आवाम की सोच अब बदलती प्रतीत हो रही है। राष्ट्र की गरिमा के साथ खिलवाड करने वालों के नकाब अब उतरते जा रहे हैं। लालच की  चाकलेट से संतुष्टि का सब्जबाग दिखाने वालों को अपने कृत्यों के प्रति स्वःचिन्तन करना चाहिए ताकि मां भारती की कार्तिमयी आभा से समूचा संसार आलोकित करने के प्रयास सफल  हो सके। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी। 


Today In JP Cinema, Chhatarpur (M.P.)