अमरावती, 13 मई । आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के विधान परिषद सदस्य अनंत बाबू को बड़ा झटका लगा है। राजमहेंद्रवरम की विशेष अदालत ने दलित ड्राइवर विधि सुब्रह्मण्यम हत्याकांड मामले में उनकी जमानत रद्द कर दी है। अनंत बाबू पर गवाहों को धमकाने और बयान बदलने के लिए पैसे का लालच देने के गंभीर आरोप लगे हैं।अनंत बाबू (जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली हुई थी) को 24 अप्रैल को राजमहेंद्रवरम में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी उस समय हुई जब वे जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत से बाहर निकले। फिलहाल उन्हें राजमहेंद्रवरम सेंट्रल जेल में रखा गया है।

इस मामले में 20 अप्रैल को काकीनाडा के सरपवरम पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। हत्या मामले के चार प्रमुख गवाहों ने शिकायत की थी कि अनंत बाबू ने उन्हें बयान बदलने के लिए बड़ी रकम देने की पेशकश की। जब उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।

तीन गवाहों ने आरोप लगाया कि एमएलसी के समर्थकों ने उन्हें एक अपार्टमेंट में जबरन बंद रखा और पुराने बयान वापस लेने के लिए दबाव बनाया। साथ ही अदालत में झूठी गवाही देने को कहा गया। इसके बाद पुलिस ने अनंत बाबू के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने और आपराधिक धमकी देने का मामला दर्ज किया।

विशेष लोक अभियोजक मुप्पाला सुब्बाराव ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश अदालत के आदेशों के खिलाफ है, इसलिए उनकी जमानत तुरंत रद्द की जानी चाहिए।

अनंत बाबू (जिनका असली नाम अनंत उदय भास्कर है) पर अपने पूर्व ड्राइवर सुब्रह्मण्यम की हत्या का आरोप है। 19 मई 2022 को काकीनाडा में 34 वर्षीय सुब्रह्मण्यम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। आरोप है कि अनंत बाबू खुद रात 2 बजे शव को कार में लेकर पीड़ित के घर पहुंचे और इसे सड़क हादसा बताया।

हालांकि परिवार ने हत्या की आशंका जताई और शव लेने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद दलित संगठनों और परिजनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में वाईएसआरसीपी ने अनंत बाबू को पार्टी से निलंबित कर दिया था।

चार्जशीट 90 दिनों के भीतर दाखिल नहीं होने के कारण दिसंबर 2022 में उन्हें डिफॉल्ट बेल मिल गई थी। जून 2024 में सत्ता में आई टीडीपी गठबंधन सरकार ने मामले की दोबारा जांच का फैसला लिया और जुलाई 2025 में एससी/एसटी विशेष अदालत ने पुनः जांच के आदेश दिए थे।