वाणिज्य की शोधार्थी वंदना ने ओपन रिसर्च वायवा में दी प्रभावी प्रस्तुति
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छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय,छतरपुर के कुलगुरु प्रो.राकेश कुशवाह की अध्यक्षता में वाणिज्य अध्ययनशाला एवं शोध केंद्र की शोधार्थी वंदना ने पी-एच.डी. उपाधि हेतु अंतिम शोध मौखिक (ओपन वायवा-वोसे) परीक्षा में पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से सटीक एवं प्रभावी प्रस्तुति दी। शोधार्थी वंदना ने अपना शोध कार्य "कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट इन लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन इन हिसार डिविजन" विषय पर अपने शोध निर्देशक प्रो. सुमति प्रकाश जैन के कुशल एवं सतत मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।
इस अवसर पर आयोजित ओपन वायवा में बाह्य परीक्षक प्रो. अधिकेश राय(प्राध्यापक,शासकीय पीजी कॉलेज,नरसिंहपुर),वाणिज्य विभागाध्यक्ष एवं डीन डॉ.बी.के. अग्रवाल,शोध निर्देशक प्रो.सुमति प्रकाश जैन,डॉ.अशोक निगम एवं डा.केबी अहिरवार सहित अनेक प्राध्यापकगण,अतिथि विद्वान, विषय विशेषज्ञ एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विभागाध्यक्ष डा बीके अग्रवाल ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी का शब्द सुमनों से स्वागत करते हुए शोधार्थी वंदना द्वारा परिश्रमपूर्वक किए गए शोध कार्य की सराहना की।इसके पश्चात शोधार्थी वंदना ने बाह्य विषय विशेषज्ञ प्रो.अधिकेश राय एवं स्टूडियो कक्ष में उपस्थित बुद्धिजीवियों के समक्ष अपनी मौखिक परीक्षा को प्रभावी तथा सटीक ढंग से प्रस्तुत किया।
हरियाणा निवासी शोधार्थी श्रीमती वंदना ने अपने शोध अध्ययन के माध्यम से यह प्रमाणित किया है कि भारतीय जीवन बीमा निगम के हिसार डिवीजन में अपनाई गई ग्राहक संबंध प्रबंधन (सीआरएम) रणनीतियां ग्राहक संतुष्टि,विश्वास,दीर्घकालीन संबंध तथा बहु-पॉलिसी अपनाने की प्रवृत्ति को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रभावी संचार प्रणाली, एजेंट-ग्राहक संबंध, आफ्टर-सेल्स सेवाएँ एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से ग्राहकों की सहभागिता में वृद्धि हुई है,जिससे संगठन की व्यावसायिक स्थिरता एवं प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ है।
शोध में यह भी उजागर किया गया है कि ग्राहक संबंध प्रबंधन के प्रभावी क्रियान्वयन में कुछ संरचनात्मक एवं व्यावहारिक चुनौतियाँ विद्यमान हैं,जिनमें विशेष रूप से ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी, तकनीकी संसाधनों की सीमित उपलब्धता तथा व्यक्तिगत परामर्श की अपर्याप्तता प्रमुख है। इन चुनौतियों के समाधान हेतु शोध में लक्षित डिजिटल जागरूकता कार्यक्रमों, क्षेत्र-विशेष एजेंट प्रशिक्षण तथा ग्राहक-केंद्रित सेवा मॉडल को सुदृढ़ करने जैसी महत्वपूर्ण नीतिगत अनुशंसाएँ प्रस्तुत की गई हैं।
बाह्य परीक्षक प्रो.अधिकेश राय ने शोध प्रबंध पर चर्चा करते हुए शोधार्थी से अनेक महत्वपूर्ण एवं गहन प्रश्न पूछे,जिनके सटीक उत्तर शोधार्थी वंदना ने दिए।उन्होंने शोध की विषय-वस्तु, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण, परिकल्पनाओं तथा प्रस्तुति को सराहनीय बताते हुए इसे जीवन बीमा क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक शोध बताया। कक्ष में उपस्थित प्राध्यापकों तथा शोधार्थियों ने भी शोधार्थी वंदना से अनेक प्रश्न पूछे,जिनका समुचित समाधान किया गया।कार्यक्रम का संचालन डा अशोक निगम ने किया।अंत में शोधार्थी वंदना ने सभी का आभार माना।
शोधार्थी वंदना को सफल शोध प्रस्तुति एवं मौखिक परीक्षा के उपरांत बाह्य विषय विशेषज्ञ प्रो. अधिकेश राय,विभागाध्यक्ष डॉ. बी.के.अग्रवाल,गाइड डा.सुमति प्रकाश जैन,डा.अशोक निगम,डा. केबी अहिरवार सहित उपस्थितजनों से अच्छे शोध कार्य एवं प्रस्तुति हेतु प्रशंसा प्राप्त हुईं।इस शैक्षिक कार्यक्रम के समापन पर शोधार्थी वंदना ने कुलगुरु प्रो राकेश सिंह, बाह्य परीक्षक डा अधिकेश राय,विभागाध्यक्ष डॉ बीके अग्रवाल,शोध निर्देशक डॉ सुमति प्रकाश जैन,डा अशोक निगम,कुलसचिव श्री यशवंत सिंह पटेल,वित्त अधिकारी श्री विजय तिर्की आदि का पुष्प मालाओं,शाल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत किया।
