यमन में गहराता गृहयुद्ध: सऊदी अरब की एयरस्ट्राइक में 20 लोगों की मौत, यूएई का फूटा गुस्सा

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यमन में सत्ता और वर्चस्व की जंग ने एक बार फिर खूनी रूप अख्तियार कर लिया है। हालिया घटनाक्रम में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। यह सैन्य कार्रवाई उस समय हुई है जब यूएई ने यमन से अपनी सेनाएं पूरी तरह वापस बुलाने की घोषणा की थी। हवाई हमले मुख्य रूप से अल खाशा और सेयून के सैन्य क्षेत्रों में किए गए, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है।
यमन का भविष्य अब एक गंभीर मोड़ पर खड़ा है, जहाँ देश के भौगोलिक बंटवारे की आशंका प्रबल होती जा रही है। लंबे समय तक यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में साथ खड़े रहने वाले सऊदी अरब और यूएई अब अप्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। दक्षिण यमन को एक स्वतंत्र देश बनाने की मांग कर रहे एसटीसी गुट ने सऊदी अरब की इस कार्रवाई के बाद युद्ध की शुरुआत का ऐलान कर दिया है। एसटीसी का आरोप है कि सऊदी समर्थित जमीनी सेना और वायुसेना ने मिलकर उनके ठिकानों को निशाना बनाया है, जो पहले से जटिल स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना रहा है।
सऊदी के इन हवाई हमलों का असर नागरिक सुविधाओं पर भी पड़ा है। सेयून शहर के हवाई अड्डे और सैन्य अड्डे को निशाना बनाए जाने के बाद वहां परिचालन पूरी तरह ठप हो गया। पिछले 24 घंटों से अधिक समय तक वहां न तो किसी विमान ने उड़ान भरी और न ही कोई लैंडिंग हो सकी। हालांकि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर एयरपोर्ट बंद करने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जमीनी हालात गंभीर बने हुए हैं। यह टकराव तब शुरू हुआ जब दिसंबर की शुरुआत में एसटीसी ने तेल संसाधनों से संपन्न हदरमौत और महरा प्रांत के महत्वपूर्ण हिस्सों पर कब्जा कर लिया था, जिसे सऊदी अरब ने अपनी रणनीति के लिए चुनौती माना।
यूएई ने इन हमलों के तुरंत बाद एक बयान जारी कर स्थिति को शांत करने की अपील की है। यूएई का दावा है कि उसकी अंतिम सैन्य टुकड़ी यमन की धरती छोड़ चुकी है। गौरतलब है कि सऊदी अरब ने हाल ही में मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी की थी, जिसका कारण यूएई से आए एक जहाज में कथित तौर पर हथियारों की मौजूदगी बताया गया था। हालांकि, यूएई ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जहाज में केवल वाहन थे। इस बीच, एसटीसी ने सऊदी अरब पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण अभियान के नाम पर सात हवाई हमले किए गए, जो उनके अस्तित्व के लिए खतरा हैं।
यमन का यह संकट साल 2014 में शुरू हुआ था, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके जवाब में 2015 में सऊदी और यूएई के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हस्तक्षेप किया था। वर्षों की हिंसा ने यमन को दुनिया के सबसे भीषण मानवीय और खाद्य संकट में धकेल दिया है। अब जबकि हूतियों के खिलाफ बना गठबंधन आंतरिक मतभेदों के कारण बिखर रहा है, यमन के एक बार फिर उत्तर और दक्षिण में बंटने की संभावना ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। 2022 में बनाया गया प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल का साझा मंच भी इन आपसी टकरावों के कारण विफल होता नजर आ रहा है।
