भर्ती परीक्षा में सेंधमारी और नगर पालिका में बंदरबांट: आबकारी परीक्षा के 12 अभ्यर्थियों पर FIR

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सतना। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के दो बड़े मामले सामने आए हैं, जिनसे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। पहला मामला आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा 2025 से जुड़ा है, जहाँ रतलाम के एक परीक्षा केंद्र में बड़े पैमाने पर धांधली उजागर हुई है। भोपाल की एमपी नगर पुलिस ने कर्मचारी चयन आयोग की शिकायत पर 12 अभ्यर्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
परीक्षा के दौरान कर्मचारी चयन आयोग के प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट प्रणीत सिजरिया ने डेटा में कुछ तकनीकी गड़बड़ी पकड़ी थी, जिसके बाद जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए तो सारा सच सामने आ गया। फुटेज में एक बाहरी व्यक्ति इन 12 छात्रों को अनुचित लाभ पहुँचाते हुए साफ नजर आ रहा था। इसके बाद आयोग ने तत्काल इन सभी का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया और अब मामले की डायरी जांच के लिए रतलाम के औद्योगिक क्षेत्र थाने भेजी गई है।
दूसरी तरफ, सिवनी जिले की लखनादौन नगर पालिका में दुकानों के आवंटन में हुई भारी अनियमितता के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने इस घोटाले में नगर पालिका अध्यक्ष मीना बलराम गोल्हानी समेत 23 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस फेहरिस्त में केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि दो पूर्व सीएमओ गजेंद्र पांडे और गीता वाल्मीक के साथ राजस्व उप निरीक्षक रवि झारिया को भी आरोपी बनाया गया है। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि प्रेसिडेंट इन काउंसिल के सदस्यों और कुछ प्रभावशाली दुकानदारों के साथ मिलकर नियमों को ताक पर रखकर दुकानों की बंदरबांट की गई थी।
इन दोनों ही घटनाओं ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम और चयन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक ओर भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करके योग्य उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका में दुकान आवंटन का खेल खेलकर सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग किया गया। फिलहाल पुलिस और ईओडब्ल्यू दोनों ही मामलों में कड़ियाँ जोड़ने में जुटी हैं और माना जा रहा है कि आने वाले समय में कुछ और रसूखदारों पर शिकंजा कसा जा सकता है।


