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भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा मजबूत: 75 प्रतिशत हिस्से में लगी नई डिजाइन वाली अभेद्य बाड़

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6 जनवरी 2026, 09:07 am IST
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पड़ोसी देश बांग्लादेश में व्याप्त अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चरम स्तर पर पहुंचा दिया गया है। विशेष रूप से सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए सीमा सुरक्षा बल ने बड़े पैमाने पर कदम उठाए हैं। इस रणनीतिक गलियारे के लगभग 75 प्रतिशत इलाके में अब नई डिजाइन की सीमा बाड़ स्थापित कर दी गई है, जो घुसपैठ और तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।


करीब 12 फीट ऊंची यह विशेष बाड़ तकनीक और मजबूती का बेजोड़ संगम है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे काटना या पार करना लगभग नामुमकिन है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पुरानी बाड़ के मुकाबले इसे क्षति पहुँचाने में कई मिनटों का समय लगता है, जिससे सुरक्षा बलों को त्वरित प्रतिक्रिया देने का पर्याप्त समय मिल जाता है। चिकन नेक क्षेत्र भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संकरा गलियारा शेष भारत को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। इसकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक पूरे पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को प्रभावित कर सकती है, यही कारण है कि यहाँ तकनीक और मानव संसाधन दोनों का समन्वय कर एक स्मार्ट बॉर्डर विकसित की जा रही है।



फिजिकल फेंसिंग के अलावा, सीमा की निगरानी के लिए अत्याधुनिक पैन-टिल्ट-जूम कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे दिन और रात के समय रीयल-टाइम लाइव फीड प्रदान करते हैं, जिससे नियंत्रण कक्ष में बैठे अधिकारी हर छोटी हलचल पर नजर रख पाते हैं। साथ ही, एरिया डोमिनेशन प्लान के तहत सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब सुरक्षा दल न केवल सीमा रेखा पर तैनात रहते हैं, बल्कि तस्करी की कड़ियों को तोड़ने के लिए भारतीय क्षेत्र के भीतर कई किलोमीटर तक छापेमारी कर रहे हैं। विशेष रूप से मवेशी तस्करी के उन अड्डों को निशाना बनाया जा रहा है, जहाँ सीमा पार ले जाने से पहले सामान इकट्ठा किया जाता है।



सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। सुरक्षा बल अब संदिग्ध तस्करों और बिचौलियों के परिवारों के पास जाकर उन्हें अवैध गतिविधियों के कानूनी और सामाजिक परिणामों के बारे में शिक्षित कर रहे हैं। इस जन-भागीदारी और विश्वास-निर्माण के उपायों का परिणाम यह हुआ है कि पिछले एक वर्ष में मवेशी और मानव तस्करी की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन बांग्लादेशी नागरिकों को, जो अनजाने में सीमा पार कर आए थे, पूरी जांच और फिंगरप्रिंट रिकॉर्डिंग के बाद फ्लैग मीटिंग के जरिए वापस उनके देश के सीमा प्रहरियों को सौंपा गया है।



आंकड़ों की बात करें तो जनवरी 2025 से अब तक सीमा पर चलाए गए अभियानों में लगभग 8.5 करोड़ रुपये मूल्य के मवेशी, सोना, चांदी, वन्यजीव उत्पाद और हथियार जब्त किए गए हैं। इस अवधि में कुल 440 बांग्लादेशी और 152 भारतीय नागरिकों सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि आने वाले समय में बाड़ के दायरे को शत-प्रतिशत तक ले जाया जाएगा और तकनीकी निगरानी को और अधिक सशक्त किया जाएगा, ताकि देश की इस लाइफलाइन की सुरक्षा में कोई सेंध न लगा सके।

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