छतरपुर/राजनगर। राजनगर न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए गांधीवादी जननेता अमित भटनागर ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों के आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासियों और विस्थापित किसानों के हक की यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है और जब तक हर प्रभावित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, वे शांत नहीं बैठेंगे।


जमानत की प्रक्रिया के दौरान मंगलवार को अमित भटनागर को वन विभाग की कार्रवाई के बाद पहले स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ उनका मेडिकल परीक्षण हुआ। इसके उपरांत दोपहर करीब 1:30 बजे उन्हें राजनगर न्यायालय में पेश किया गया। मामले की गंभीरता और दलीलों को सुनने के बाद देर शाम प्रथम श्रेणी सिविल न्यायाधीश मृदुल लटोरिया ने उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए।


न्यायालय परिसर के बाहर सुबह से ही बड़ी संख्या में विस्थापित किसान और आदिवासी समाज के लोग अपने नेता की रिहाई के इंतजार में डटे रहे। रिहा होने के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए अमित भटनागर ने प्रशासन पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों हरे-भरे वृक्षों को काटकर उनकी अवैध सप्लाई की जा रही है और इस बड़े मुद्दे को दबाने के लिए ही उन पर बार-बार प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज तक विस्थापित किसानों के बीच एक भी ग्राम सभा नहीं हुई है और कागजों में जो भी दर्ज है, वह पूरी तरह फर्जी है।


भटनागर ने किसानों की इस लड़ाई में समर्थन देने के लिए कांग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा, सपा और अन्य सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे किसानों के हक की इस लड़ाई में आगे आएं। उन्होंने दोहराया कि यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों के जीवन और जमीन की लड़ाई है जिन्हें बिना उचित प्रक्रिया और न्याय के विस्थापित किया जा रहा है।