टीकमगढ़, मोहसिन अहमद। मुहर्रम के अवसर पर टीकमगढ़ शहर में हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में पूरे सम्मान, अकीदत और गम के साथ ताज़िया जुलूस निकाला गया। शहर के विभिन्न मोहल्लों से निकले ताज़ियों में हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। पूरे आयोजन के दौरान अमन, भाईचारे और अनुशासन का माहौल देखने को मिला।

जुलूस मार्ग पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए शर्बत, पानी और लंगर की व्यवस्था की। भीषण गर्मी के बावजूद लोगों ने पूरे संयम और श्रद्धा के साथ जुलूस में भाग लिया। सेवा कार्यों में जुटे स्वयंसेवकों की श्रद्धालुओं ने मुक्तकंठ से सराहना की।

इस वर्ष मुहर्रम आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता पूरे शहर में बनी रही निर्बाध बिजली व्यवस्था रही। ताज़िया जुलूस के दौरान कहीं भी विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं हुई, जिससे ताज़िए निर्धारित मार्गों से बिना किसी व्यवधान के निकले और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

ताज़िया जुलूस से पहले सहायक यंत्री नितिन बाथम के निर्देशन में बिजली विभाग की टीम ने पूरे जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया। जहां-जहां विद्युत केबलें नीचे थीं, उन्हें ऊंचा कराया गया तथा आवश्यक मरम्मत एवं दुरुस्ती का कार्य समय रहते पूरा कराया गया। इन तैयारियों के चलते पूरे आयोजन के दौरान विद्युत व्यवस्था सुचारु बनी रही। शहरवासियों और ताज़िया समितियों ने सहायक यंत्री नितिन बाथम एवं उनकी टीम की कार्यशैली की सराहना करते हुए इसे बेहतर समन्वय और जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

मुहर्रम के आयोजन को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। एसडीएम, एसडीओ, तहसीलदार, थाना प्रभारियों सहित बड़ी संख्या में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने जुलूस मार्ग पर लगातार निगरानी रखी। चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुहर्रम का आयोजन सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

मुहर्रम कर्बला की उस ऐतिहासिक कुर्बानी की याद दिलाता है, जब लगभग 1400 वर्ष पूर्व हज़रत इमाम हुसैन, उनके परिवारजनों और 72 साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को सब्र, इंसाफ, मानवता और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

टीकमगढ़ में इस वर्ष मुहर्रम का आयोजन धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द, प्रशासनिक सतर्कता और बेहतर व्यवस्थाओं की एक मिसाल बनकर सामने आया, जिसकी शहरभर में सराहना की जा रही है।