गुना। गुना में एक निजी स्कूल पर 6 साल की टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्ची और उसकी बहन को स्कूल से निकालने का गंभीर आरोप लगा है। बच्ची के पिता, जो फूड डिलीवरी का काम करते हैं, का कहना है कि बीमारी की जानकारी देने के बाद स्कूल प्रबंधन ने दोनों को टीसी देकर बाहर कर दिया। बच्ची को नियमित इंसुलिन और शुगर जांच की जरूरत होती है, लेकिन इसके बावजूद वह पढ़ाई में बेहद होनहार थी और अपनी कक्षा में प्रथम स्थान पर आती थी। पिता का आरोप है कि पहले स्कूल ने सहयोग का भरोसा दिया, लेकिन बाद में अचानक यह कदम उठाया गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. नीरव शर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि स्कूल द्वारा कोई नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया।वहीं, स्कूल संचालक जॉय वर्गीस ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अभिभावक की कुछ मांगों के चलते विवाद हुआ था और उन्हें विकल्प के रूप में टीसी लेने की बात कही गई थी।
यह मामला बच्चों के शिक्षा के अधिकार से जुड़ा है। भारत में Right to Education Act के तहत 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है। ऐसे में किसी भी बीमारी के आधार पर बच्चे को स्कूल से निकालना गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल जांच जारी है और सभी की नजर उसके नतीजों पर टिकी है।

