भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सोमवार को उस वक्त युवा जोश और विधायी अनुभव के अनूठे संगम की गवाह बनी, जब दो दिवसीय 'युवा विधायक सम्मेलन' का भव्य आगाज हुआ। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 45 वर्ष से कम आयु के 63 युवा जनप्रतिनिधियों की इस मौजूदगी का सार उस मंथन में छिपा है, जहाँ लोकतंत्र की जड़ों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की उपस्थिति में शुरू हुए इस समागम ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में भारतीय राजनीति का चेहरा 'अनुशासन' और 'जनभागीदारी' के नए मानकों पर आधारित होगा।
पश्चिमी मॉडल से अलग भारतीय लोकतंत्र और सीएम का 'मर्यादा' मंत्र
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय लोकतंत्र की विशिष्टता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र पश्चिमी मॉडल की नकल मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक मूल्यों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से उपजी एक जीवंत प्रणाली है। मुख्यमंत्री ने युवा विधायकों को 'अमृत काल' की जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए 'राजनीतिक मर्यादा' और 'अनुशासन' का मंत्र दिया। उनका स्पष्ट मानना है कि एक सफल जनप्रतिनिधि वही है जो सीधे जनता से जुड़े और सत्ता को सेवा का माध्यम समझे, न कि केवल शासन की व्यवस्था।
नीयत सही तो संविधान सफल: विधानसभा अध्यक्ष का संदेश
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के कालजयी विचारों का स्मरण कराते हुए युवा विधायकों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी संविधान तभी सफल सिद्ध होता है जब उसे लागू करने वालों की नीयत साफ हो। तोमर ने संस्थागत मजबूती के साथ-साथ व्यक्तिगत शुचिता पर बल देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का असली कार्य निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा करना है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी ने इस चर्चा को और अधिक गरिमा प्रदान की।
छात्र संघ चुनाव और नेतृत्व की पौध: विपक्ष की मांग
सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए छात्र संघ चुनावों की बहाली की वकालत की। उनका तर्क था कि भविष्य के नेतृत्व की पौध कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से ही तैयार होती है। सिंघार ने युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज के जनप्रतिनिधियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित संसाधनों और क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है। उनकी इस मांग ने सम्मेलन में युवा नेतृत्व के लोकतांत्रिक आधार पर एक नई बहस छेड़ दी है।
लोक संस्कृति का रंग और 'माई-बाप' संस्कृति पर तीखा प्रहार
सम्मेलन की शुरुआत प्रदेश की समृद्ध लोक कला और पारंपरिक नृत्यों के साथ हुई, जिसने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की झलक पेश की। हालांकि, इस भव्यता के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन का बयान भी सुर्खियों में रहा, जिन्होंने पार्टी के भीतर पनप रही 'माई-बाप' संस्कृति पर कटाक्ष करते हुए अपनी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए। फिलहाल, दो दिनों तक चलने वाला यह मंथन जारी है, जहाँ युवा विधायक विधायी प्रक्रियाओं को समझने के साथ-साथ भविष्य के 'विकसित भारत' की रूपरेखा पर चर्चा कर रहे हैं।



