इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17वीं मौत

indore water tragedy
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रवि कान्त वर्मा
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा जल आपूर्ति लाइन में सीवेज रिसाव के कारण दूषित पानी की सप्लाई से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग उल्टी, दस्त और डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। ताजा मामले में रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा (69 वर्ष) की मौत हुई है, जो मूलत: धार जिले के शिव विहार कॉलोनी के निवासी थे। वे अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे। 1 जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां जांच में किडनी खराब होने की बात सामने आई। हालत बिगडऩे पर 2 जनवरी को उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया और बाद में वेंटिलेटर पर रखा गया। रविवार दोपहर उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार वे केवल ब्लड प्रेशर के मरीज थे और दूषित पानी से उनकी किडनी प्रभावित हुई। रविवार तक मौतों का आंकड़ा 16 था, जो अब 17 हो गया है। अस्पतालों की स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल में आईसीयू में भर्ती 11 मरीजों में से 4 को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है, जबकि 7 का आईसीयू में इलाज जारी है। अब तक कुल 398 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए, जिनमें से 256 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। वर्तमान में 142 मरीजों का इलाज चल रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जांच टीम भेजी
वहीं जांच रिपोर्ट्स में पानी के सैंपलों में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो कोलेरी (हैजा का बैक्टीरिया), साल्मोनेला और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं। मुख्य कारण भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज बताया जा रहा है, जहां सीवेज का पानी पीने की लाइन में मिल गया। स्वास्थ्य विभाग ने इसे क्षेत्रीय महामारी घोषित कर दिया है।
कलेक्टर व निगम आयुक्त का दौरा
प्रशासन की ओर से राहत के प्रयास तेज हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा और नव नियुक्त नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने क्षेत्र का दौरा कर हालात की समीक्षा की। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) कोलकाता की विशेषज्ञ टीम ने भी अधिकारियों से चर्चा की। प्रशासन तीन स्तरों पर काम कर रहा है: लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान और भर्ती, अस्पतालों में मॉनिटरिंग तथा डिस्चार्ज मरीजों की फॉलो-अप जांच।
वहीं नगर निगम की टीमें सर्वे कर रही हैं, लीकेज ठीक किए जा रहे हैं और पानी का क्लोरीनेशन किया जा रहा है। पीने के लिए क्लोरीन युक्त पानी और अन्य उपयोग के लिए सुरक्षित बोरवेल का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। टैंकरों से शुद्ध जल की आपूर्ति जारी है। क्षेत्र को 32 बीट्स में बांटकर माइक्रो लेवल पर निगरानी हो रही है। कलेक्टर ने गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) की अफवाहों को खारिज किया और कहा कि किसी मरीज में इसकी पुष्टि नहीं हुई। नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और समस्या की तुरंत सूचना देने की अपील की गई है। प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावितों से मुलाकात की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी विशेषज्ञ टीमों को भेजा है, जिनमें कोलकाता के एनआईआरबीआई और एम्स भोपाल की टीमें शामिल हैं। हाल की रिपोर्ट्स में नए पानी के सैंपल बैक्टीरिया मुक्त पाए गए हैं, जो स्थिति नियंत्रण में आने का संकेत है। प्रशासन का दावा है कि संकट पर काबू पाया जा रहा है और विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है।
