नई दिल्ली। भारत का खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) क्षेत्र अपार अवसर प्रदान करता है और रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा देने, किसानों की आय मजबूत करने तथा दुनिया में भारत की पहचान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को यह बात कही।
हरियाणा के सोनीपत जिले के कुंडली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (निफ्टेम-के) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पासवान ने स्नातक छात्रों से कहा कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, बल्कि रोजगार देने वाले, नवाचारकर्ता और समस्याओं का समाधान करने वाले बनें।
मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में हुई प्रगति के बावजूद खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अभी भी बहुत बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका पूरा उपयोग नहीं हुआ है। यह क्षेत्र बेहतर खाद्य गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन, किसानों के लिए मजबूत आर्थिक अवसर, रोजगार सृजन और खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने में एक साथ योगदान दे सकता है।
उन्होंने छात्रों से पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने का आग्रह करते हुए कहा कि वे तकनीक, नवाचार और उद्यमिता का उपयोग करके उभरती चुनौतियों के समाधान खोजें। उन्होंने युवा नवाचारकर्ताओं को आश्वासन दिया कि सरकार इस क्षेत्र को मजबूत बनाने वाले नए विचारों और पहलों का समर्थन करेगी।
मंत्री ने गुणवत्ता बनाए रखने की भी जोरदार अपील की और कहा कि खाद्य क्षेत्र में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भारतीय उत्पाद की गुणवत्ता केवल एक कंपनी की प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में "ब्रांड इंडिया" की छवि को भी प्रभावित करती है।
पासवान ने कहा कि भारत का विशाल कृषि आधार, विविध कृषि उत्पाद और बड़ा उपभोक्ता बाजार देश को "वैश्विक खाद्य भंडार (ग्लोबल फूड बास्केट)" बनने की क्षमता देता है। उन्होंने खाद्य मूल्य श्रृंखला, प्रसंस्करण सुविधाओं और तकनीक को खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों के करीब ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि खाद्य प्रसंस्करण के लाभ सीधे किसानों और जमीनी स्तर के उत्पादकों तक पहुंच सकें।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने खाद्य प्रसंस्करण की व्यापक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह खाद्य बर्बादी कम करने, पोषण और मूल्य संवर्धन बढ़ाने, आजीविका के अवसर पैदा करने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने कुशल मानव संसाधन विकसित करने और छात्रों तथा शोधकर्ताओं को ऐसे विचारों और नवाचारों पर काम करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो बड़े स्तर पर मूल्य सृजित कर सकें।
निफ्टेम-के के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेराय ने कहा कि संस्थान ने शिक्षा, शोध, बुनियादी ढांचे और उद्योगों के साथ साझेदारी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।













