नई दिल्ली। डायरिया यानी दस्त एक आम बीमारी लग सकती है, लेकिन अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो यह खासकर छोटे बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। हालांकि डायरिया से बचाव कोई मुश्किल काम नहीं है। हमारी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें बच्चों और पूरे परिवार को इस बीमारी से काफी हद तक सुरक्षित रख सकती हैं।
सबसे जरूरी है हाथों की सफाई। खाना खाने या खिलाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद साबुन और साफ पानी से हाथ जरूर धोने चाहिए। कई बार गंदे हाथों के जरिए कीटाणु खाने और पानी तक पहुंच जाते हैं और यही डायरिया की बड़ी वजह बनते हैं।
साफ और सुरक्षित पीने का पानी भी बेहद जरूरी है। घर में इस्तेमाल होने वाले पानी को साफ और ढककर रखे गए बर्तनों में रखना चाहिए। बच्चों को हमेशा साफ और सुरक्षित पानी ही पिलाएं। पानी को खुले बर्तन में रखने से उसमें गंदगी और कीटाणु पहुंच सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
छोटे बच्चों के लिए जन्म के बाद पहले 6 महीने तक केवल मां का दूध ही दिया जाता है। इसके बाद उम्र के हिसाब से पौष्टिक और सही पूरक आहार देना चाहिए। मां का दूध बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है और कई संक्रमणों से बचाव करता है।
घर और आसपास की साफ-सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है। शौच के लिए हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें और बच्चों को भी इसकी आदत डालें। नालियों और आसपास जमा गंदगी की नियमित सफाई करें, क्योंकि गंदा वातावरण बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है।
अगर बच्चे या किसी अन्य व्यक्ति को डायरिया हो जाए तो शरीर में पानी की कमी न होने दें। ऐसे समय में ओआरएस और जिंक दिया जा सकता है। इसके बाद मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ले जाएं।




