लंदन। क्या इंसानों का लिखा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिखे से बेहतर है और क्या कहानी रचने-गढ़ने में एआई माहिर है? तो इसका जवाब काफी हद तक 'हां' में है। एक हालिया अध्ययन इसकी तस्दीक करता है।

इस शोध के अनुसार एआई से तैयार लेख को गुणवत्ता के मामले में मानव लिखित सामग्री से बेहतर रेटिंग मिली है। पाठकों ने एआई जेनेरेटेड लेखों को अधिक स्पष्ट, निष्पक्ष और पढ़ने में आसान बताया।

ये लेख अमेरिका से प्रकाशित 'जजमेंट एंड डिसीजन मेकिंग' जर्नल में छपा। इसमें 1,682 व्यस्कों को शामिल किया गया। इन सभी प्रतिभागियों को छह लघु कहानियां पढ़ाई गईं। इनमें से छह मानव रचित थीं और छह चैटजीपीटी ने लिखी थी। तीनों एआई कॉपी का थीम मानव रचित कहानियों के समान ही था।

अध्ययन के अनुसार, प्रतिभागियों को यह नहीं बताया गया कि कौन-सा लेख किसने लिखा है। मूल्यांकन में एआई द्वारा तैयार सामग्री को भाषा की स्पष्टता, संरचना और निष्पक्षता के पैमानों पर अधिक अंक मिले।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष में स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि एआई नॉवेल राइटर्स की जगह लेने के लिए तैयार है। अध्ययन में कहा गया कि स्टोरी के तथ्य जुटाना, तथ्यों का सत्यापन, स्रोतों से जानकारी हासिल करना और जवाबदेही तय करना जैसे कार्य अब भी इंसानों की अहम भूमिका बने हुए हैं।

पेन्सिलवेनिया की विलानोवा यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ रिसर्च शोधार्थी डॉ. डीना स्कोल्निक वीसबर्ग ने कहा, “एआई सिस्टम पहले से ही ऐसी छोटी कहानियां बना सकते हैं जिन्हें इंसानों की लिखी कहानियों जितना ही अच्छा माना जाता है। हमें एआई की काबिलियत के बारे में अपने नजरिए को उसी हिसाब से अपडेट करना चाहिए।”

हालांकि, वीसबर्ग, जो खुद एक क्रिएटिव राइटर हैं, ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि लिखना एआई पर छोड़ देना चाहिए, उन्होंने कहा कि टेक से बनने वाले नॉवेल शायद इंसानों के लिखे नॉवेल से अलग होंगे।

उन्होंने कहा, “हमें एआई से बनने वाले नॉवेल और एआई/इंसानों के मिलकर लिखे उपन्यास के लिए जगह बनानी पड़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब हमारे पास इंसानी क्रिएटिविटी के प्रोसेस की तारीफ करने की जगह नहीं है।”