उत्तराखंड (बद्रीनाथ), रोहित पाठक। उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम की कड़कड़ाती ठंड और देवभूमि की वादियों में इन दिनों बागेश्वर महाराज की अत्यंत कठिन और विशेष साधना मंगलवार को संपन्न हो चुकी है। बागेश्वर महाराज की इस साधना के निर्विघ्न संपन्न होने, उनके उत्तम स्वास्थ्य और उनके लोक-कल्याणकारी संकल्पों की पूर्णता के लिए भक्तों का एक दल भी पूरी तरह भक्ति भाव में डूबा हुआ है। उत्तर प्रदेश के मोदीनगर की रहने वाली श्रद्धालु ऋतु रोहेला और उनके समूह के 7-8 सदस्यों ने बागेश्वर महाराज की इस दिव्य साधना को सफल बनाने के लिए एक बेहद कठिन और अनूठा धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया है। इस पूरे समूह द्वारा 5 मई से आगामी 30 मई तक प्रतिदिन नियमपूर्वक हनुमान चालीसा के 108 पाठ किए जा रहे हैं, जिसमें बड़ों के साथ-साथ 5 से 6 साल के छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां भी पूरी तन्मयता से शामिल होकर भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं।
समूह की मुख्य सेवादार ऋतु रोहेला ने बद्रीनाथ धाम में चर्चा करते हुए बताया कि बागेश्वर महाराज की यह विशेष साधना 6 मई से शुरू होनी तय थी। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 5 मई को ज्येष्ठ मास के बड़े मंगलवार के पावन संयोग से ही इस महा-अनुष्ठान का संकल्प ले लिया था। ऋतु रोहेला और उनके साथ आए गुरु भाइयों व गुरु बहनों के पूरे मंडल ने तय किया कि जब तक गुरुदेव की साधना चलेगी, तब तक वे प्रतिदिन हनुमान चालीसा के 108 पाठ और विशेष सुंदरकांड का आयोजन अनवरत जारी रखेंगे। उनका यह अखंड संकल्प आगामी 30 मई तक चलेगा। ऋतु ने बताया कि वे अपने आराध्य गुरुदेव और सन्यासी बाबा के दर्शन करने के लिए विशेष रूप से मोदीनगर से बद्रीनाथ धाम आई हैं। भले ही वे अब अपने गृह नगर से दूर पहाड़ों पर हैं, लेकिन उनका यह पाठ का संकल्प यहाँ ठहरने के दौरान भी दो-तीन दिनों तक पूरी निष्ठा के साथ जारी रहेगा।
भक्तों के इस दल का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल अपने गुरुदेव बागेश्वर सरकार के आध्यात्मिक संकल्पों को सिद्ध करना है। ऋतु रोहेला ने भावुक होते हुए कहा कि वे सन्यासी बाबा से सिर्फ एक ही प्रार्थना कर रही हैं कि पूज्य गुरुदेव की यह कठिन साधना पूरी तरह सफल रहे, उन्हें सन्यासी बाबा के साक्षात दर्शन प्राप्त हों, वे सदैव पूर्णतः स्वस्थ और दीर्घायु रहें तथा सनातन धर्म की रक्षा के लिए उनके मन में जो भी संकल्प हैं, वे सब बाबा की कृपा से पूर्ण हों। इस अनुष्ठान की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह है कि ऋतु रोहेला की महज 6 साल की छोटी सी भांजी सहित घर के अन्य बच्चे भी रोज़ाना बिना चूके गुरुदेव भगवान के लिए हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं, जो नई पीढ़ी में संस्कारों की एक अमिट मिसाल है।



