अटूट आस्था: 36 घंटे की कठिन दंडवत यात्रा कर डबरा पहुँचे भक्त, बागेश्वर महाराज ने मंच पर पहनाई पगड़ी

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डबरा, रोहित पाठक। भक्ति की शक्ति और संकल्प का विजय: डबरा में चल रही हनुमान कथा के बीच आज आस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसे देखकर पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गई और पूरा वातावरण 'जय श्री राम' के उद्घोष से गूंज उठा।
बड़ोल कला निवासी नंदकिशोर प्रजापति अपने जीवन के सबसे कठिन संकल्प को पूरा करते हुए लगातार 36 घंटे तक दंडवत (लेटकर प्रणाम करते हुए) यात्रा कर डबरा कथा पंडाल पहुँचे। उन्होंने अपनी यह दुर्गम यात्रा 17 फरवरी की सुबह 5 बजे अपने गाँव के मंदिर स्थित काशी बाबा के स्थान से प्रारंभ की थी। बिना रुके और बिना थके, भक्ति के मार्ग पर चलते हुए नंदकिशोर ने आज शाम 5 बजे कथा स्थल पर पहुँचकर अपना संकल्प पूर्ण किया।
साथियों का सहयोग और अटूट हौसला
इस तपस्या भरे मार्ग में नंदकिशोर अकेले नहीं थे, बल्कि उनके गाँव के ही चार साथी—सुनील बांसकर, प्रमोद प्रजापति, नारायण प्रजापति और रामकुमार प्रजापति—पूरी यात्रा के दौरान उनके रक्षक और संबल बनकर साथ रहे। हाथों में धर्म ध्वजा लिए इन भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। जब यह टोली धूल और पसीने से लथपथ लेकिन चेहरे पर संतोष का भाव लिए पंडाल पहुँची, तो हर कोई इनकी श्रद्धा के आगे नतमस्तक हो गया। नंदकिशोर ने बताया कि उनका एकमात्र लक्ष्य दंडवत करते हुए डबरा पहुँचकर महाराज श्री के दर्शन करना था, जो आज पूरा हो गया।
महाराज श्री ने मंच पर बुलाकर दिया सम्मान
जैसे ही बागेश्वर महाराज पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपने इस अनन्य भक्त के कठिन तप की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत नंदकिशोर और उनके साथियों को मंच पर ससम्मान आमंत्रित किया। महाराज श्री ने स्वयं आगे बढ़कर सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया और नंदकिशोर प्रजापति को विशेष रूप से पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। महाराज ने उन्हें भेंट प्रदान करते हुए कहा कि ऐसी निस्वार्थ श्रद्धा ही ईश्वर को प्रसन्न करती है। अपनी मनोकामना पूर्ण होने और महाराज के हाथों मिले इस सम्मान को नंदकिशोर ने अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया।

