ग्वालियर | ग्वालियर शहर के प्रतिष्ठित गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब शनिवार की शाम पिकनिक मनाने गए एमबीबीएस (MBBS) द्वितीय वर्ष के दो होनहार छात्रों की तिघरा डैम में डूबने से असमय मौत हो गई। संतुलन बिगड़ने और पथरीले किनारे से पैर फिसलने के कारण दोनों दोस्त करीब 40 से 50 फीट गहरे पानी में समा गए थे। पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम द्वारा चलाए गए संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों छात्रों के शवों को बांध की गहराई से बाहर निकाल लिया गया है।


प्रतिबंधित क्षेत्र में गए थे 4 छात्र और 4 छात्राएं, किनारे पर रखे मिले जूते-कपड़े

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गजराराजा मेडिकल कॉलेज के 8 छात्र-छात्राओं (4 छात्र और 4 छात्राएं) का एक ग्रुप शनिवार की शाम को घूमने के लिए तिघरा डैम पहुंचा था। यह ग्रुप मुख्य बोट क्लब से करीब 3 किलोमीटर दूर 'कच्ची पार' नामक इलाके में चला गया था। उल्लेखनीय है कि सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन द्वारा इस पूरे क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक (प्रतिबंध) लगा रखी है।


शाम 7 बजे हुआ हादसा:

शाम करीब 7:00 बजे ग्रुप के दो छात्र आयुष श्रीवास्तव और गोपाल अग्रवाल पानी के करीब उतरे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, डैम के पथरीले और फिसलन भरे किनारे पर अचानक उनका पैर फिसल गया। संभलने का मौका न मिलने और संतुलन बिगड़ने से दोनों छात्र सीधे गहरे पानी में चले गए।


रातभर चला सर्च ऑपरेशन, पत्थरों और झाड़ियों के बीच फंसे थे शव

बाकी साथी जब पिकनिक स्पॉट से थोड़ा नीचे आए और काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटे, तो उनकी खोजबीन शुरू हुई। डैम के किनारे दोनों छात्रों के कपड़े और जूते सलीके से रखे मिले, जिससे अनहोनी की आशंका गहरा गई। साथियों ने तुरंत पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही सीएसपी कृष्णपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। तत्काल एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम ने मोर्चा संभाला। रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार देर रात ही गोपाल अग्रवाल का शव पानी से निकाल लिया था, जबकि दूसरे छात्र आयुष श्रीवास्तव का शव रविवार दोपहर करीब 2:00 बजे मिला। आयुष का शव पानी के भीतर करीब 50 फीट गहराई में पत्थरों और जलीय झाड़ियों के बीच फंसा हुआ था।


पहली बार में NEET क्रैक करने वाला गोपाल था परिवार का लाड़ला

इस दर्दनाक हादसे ने दो हंसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझा दिए:

गोपाल अग्रवाल (बीना, सागर): मृतक छात्र गोपाल के जीजा प्रदीप अग्रवाल ने रुंधे गले से बताया कि गोपाल अपने दो भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटा और पूरे परिवार का लाड़ला था। वह पढ़ाई में अत्यंत कुशाग्र था। उसने साल 2024 में अपने पहले ही प्रयास में देश की सबसे कठिन NEET परीक्षा पास की थी और डॉक्टर बनने का सपना लेकर ग्वालियर आया था। पिता के पास कोई खास काम न होने के कारण बड़े भाई पीयूष ही उसकी पढ़ाई का खर्च उठा रहे थे। गोपाल हमेशा कहता था कि डॉक्टर बनकर वह भाई का सहारा बनेगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।


आयुष श्रीवास्तव (मुजफ्फरपुर, बिहार): हादसे का शिकार हुए दूसरे छात्र आयुष श्रीवास्तव बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले थे। दोनों ही होनहार छात्रों के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है और वे शवों को सुपुर्दगी में लेने के लिए ग्वालियर पहुंच चुके हैं।


मेडिकल कॉलेज के लिए अपूरणीय क्षति: डीन डॉ. आरकेएस धाकड़

घटना के बाद गजराराजा मेडिकल कॉलेज परिसर और हॉस्टल में सन्नाटा पसरा हुआ है। कॉलेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, "यह बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना है। हमारे संस्थान के दो बेहद होनहार छात्र पिकनिक के दौरान हादसे का शिकार हो गए। यह ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। इस दुख की घड़ी में संस्थान और पीड़ित परिवारों पर क्या गुजर रही है, इसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है।" पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।