छतरपुर| बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास तथा महाराजा छत्रसाल की अद्वितीय शौर्यगाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से मऊसहानियां में एक भव्य आयोजन होने जा रहा है। महाराजा छत्रसाल जयंती के उपलक्ष्य में आगामी 17 एवं 18 जून को दो दिवसीय 'विरासत महोत्सव 2026' का भव्य आगाज मऊसहानियां स्थित शौर्य पीठ में किया जाएगा। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में हो रहे इस महोत्सव का आयोजन जिला प्रशासन छतरपुर एवं महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान, मऊसहानियां के साझा सहयोग से किया जा रहा है। इस दो दिवसीय महोत्सव में देशभर के ख्याति प्राप्त कलाकार बुंदेली संस्कृति, लोकनृत्य और लोकगायन के विविध रंगों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।


प्रथम दिवस (17 जून): "महाबली महाराजा छत्रसाल" नृत्य-नाटिका और ब्रज-बुंदेली का संगम

महोत्सव के पहले दिन 17 जून की संध्या पूरी तरह ऐतिहासिक शौर्य और लोक कलाओं के नाम रहेगी।

मुख्य आकर्षण: भोपाल के सुप्रसिद्ध रंगकर्मी और कलाकार चंद्र माधव बारीक द्वारा निर्देशित भव्य नृत्य-नाटिका “महाबली महाराजा छत्रसाल” का मंचन किया जाएगा। यह नाटिका महाराजा छत्रसाल के संघर्ष और उनके अदम्य साहस की गाथा को जीवंत करेगी।


सांस्कृतिक रंग: इसके साथ ही महारानी गणेश कुंवर (राजेश लिटोरिया) के दल द्वारा मनमोहक मयूर नृत्य, बरसाने की प्रसिद्ध लट्ठमार होली एवं अन्य आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो दर्शकों को ब्रज एवं बुंदेली संस्कृति के अनुपम अंतर्संबंधों से रूबरू कराएंगी।


द्वितीय दिवस (18 जून): पांडवानी और "धन्य-धन्य बुंदेल धर" की गूंज

महोत्सव के दूसरे और अंतिम दिन 18 जून की शाम को लोकगायन और शास्त्रीय लोक विधाओं का अनूठा समागम देखने को मिलेगा।


बुंदेली लोकगायन: दिल्ली से आ रही प्रख्यात लोक गायिका मुस्कान प्रजापति अपनी सुरीली आवाज में बुंदेली लोकगीतों की प्रस्तुतियां देंगी।


पांडवानी गायन: छत्तीसगढ़ के रायपुर की सुप्रसिद्ध कलाकार समप्रिया पूजा निषाद अपनी चिरपरिचित और बेहद लोकप्रिय पांडवानी शैली के माध्यम से महाभारत की वीरगाथाओं का जीवंत चित्रण मंच पर प्रस्तुत करेंगी।


विशेष सामूहिक प्रस्तुति: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ओरछा के सुमित मिश्रा एवं उनके 37 सदस्यीय विशाल सांस्कृतिक दल द्वारा दी जाने वाली “धन्य-धन्य बुंदेल धर” की प्रस्तुति होगी। इसमें बुंदेलखंड की सांस्कृतिक गरिमा, ऐतिहासिक वैभव और यहाँ के पारंपरिक लोकजीवन को एक साथ बेहद प्रभावशाली ढंग से कोरियोग्राफ कर मंचित किया जाएगा।


जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम, आमजन को खुला आमंत्रण

आयोजकों के अनुसार, यह महोत्सव केवल एक सामान्य सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह बुंदेलखंड की आत्मा, अस्मिता और गौरवशाली परंपराओं का जीवंत उत्सव है। संस्कृति प्रेमियों, शोधार्थियों और आमजन की व्यापक सहभागिता वाले इस आयोजन को बुंदेलखंड की विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान, मऊसहानियां और जिला प्रशासन छतरपुर ने अंचल के समस्त संस्कृति प्रेमियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, युवाओं तथा आम नागरिकों से अपील की है कि वे 17 एवं 18 जून को शौर्य पीठ, मऊसहानियां में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस भव्य विरासत महोत्सव के साक्षी बनें और कलाकारों का उत्साहवर्धन कर कार्यक्रम को सफल बनाएं।