भोपाल। राजधानी भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम के नोटिस और संभावित सीलिंग की कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का आक्रोश फूट पड़ा है। मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे पर जुटे सैकड़ों व्यापारियों ने सरकार को सीधे तौर पर तीन विकल्प देते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। 10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने दो टूक कहा कि सरकार के पास तीन ही रास्ते हैं—
- वर्ष 2005 से अटका मास्टर प्लान तत्काल लागू किया जाए,
- गुजरात की तर्ज पर मिक्स्ड लैंड यूज (मिश्रित भूमि उपयोग) नीति लाई जाए, और
- नगर निगम द्वारा की जा रही सीलिंग व नोटिस की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो पूरे भोपाल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा, चक्काजाम होगा और मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा।
'टैक्स और कमर्शियल बिल हम दें, फिर सीलिंग क्यों?'—रोजी-रोटी पर संकट
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि 2005 से मास्टर प्लान अटकाना प्रशासन की नाकामी है, जिसकी सजा अब आम कारोबारियों को भुगतनी पड़ रही है। हाउसिंग बोर्ड और अन्य इलाकों के कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने खुद कमर्शियल बिजली के मीटर लगाए, दुकानों की रजिस्ट्रियां कीं और नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स व कमर्शियल टैक्स वसूला। अब अचानक दुकानों को सील करने की धमकी दी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई से शहर का 90% कारोबार प्रभावित होगा, जिससे लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे और बच्चों की स्कूल फीस तक भरना दूभर हो जाएगा। विरोध प्रदर्शन में पहली बार बड़ी संख्या में ब्यूटीशियन और सैलून संचालक भी शामिल हुए।
विधानसभावार 7,158 से अधिक नोटिस जारी, 3 दिन की अंतिम मोहलत
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद नगर निगम ने आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे तेज कर दिया है। अब तक शहरभर में 7,158 नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि कुल 62,500 से अधिक संपत्तियां चिन्हित की गई हैं। यह आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंचने का अनुमान है।
- नरेला विधानसभा: 1,470 नोटिस
- गोविंदपुरा विधानसभा: 1,250 नोटिस
- मध्य विधानसभा: 1,093 नोटिस
- हुजूर विधानसभा: 1,032 नोटिस
- दक्षिण-पश्चिम विधानसभा: 652 नोटिस
- उत्तर विधानसभा: 371 नोटिस
उपायुक्त भुवन गुप्ता के अनुसार, 3 दिन की समयावधि समाप्त होने के बाद अधिभोग उल्लंघन (Occupancy Violation) के मामलों में गुण-दोष के आधार पर अंतिम आदेश पारित कर सीलिंग और बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
2005 से मास्टर प्लान न आना बना समस्या की मूल जड़
सीनियर एडवोकेट एहतेशाम कुरैशी का कहना है कि भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान वर्ष 1995 में लागू हुआ था। 2005 में नया प्लान आना था, लेकिन 20 साल बाद भी नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया। मास्टर प्लान के अभाव में शहर का अनियोजित विस्तार कोलार, नर्मदापुरम रोड, रातीबड़ और रायसेन रोड तक होता चला गया। यदि राज्य सरकार समय पर कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखती और 'अनधिकृत विकास नियमितीकरण' का ढांचा तैयार करती, तो आज लाखों कारोबारियों और रहवासियों के सामने यह गंभीर संकट पैदा नहीं होता।




