सबूत खुलेआम, फिर भी कार्रवाई नहीं बस संचालकों को किसका संरक्षण

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छिंदवाड़ा,ज़ीसान अंसारी। मध्यप्रदेश पचमढ़ी के प्रसिद्ध चौरागढ़ महादेव मेले के दौरान बस संचालकों द्वारा नियम-कानूनों की खुलेआम अनदेखी का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। छिंदवाड़ा से पचमढ़ी और भूरा भगत मार्ग पर संचालित बसों में मोटरयान अधिनियम के स्पष्ट उल्लंघन सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
नीलकमल बस क्रमांक MP-28-P-0325 सहित अन्य बसों में ओवरलोडिंग, तय किराये से अधिक वसूली, किराया सूची न लगाना और यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे गंभीर उल्लंघन दर्ज किए गए हैं। मोटरयान अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में भारी जुर्माना, चालान और यहां तक कि परमिट निरस्तीकरण का भी प्रावधान है, लेकिन परिवहन विभाग की कार्रवाई फिलहाल केवल समझाइश और औपचारिकताओं तक सीमित नजर आ रही है।
जब बस नंबर, तस्वीरें और नियम उल्लंघन के स्पष्ट सबूत मौजूद हैं, तो फिर कार्रवाई में हो रही देरी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम बात यह है कि महादेव मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डालकर बसों का संचालन किया जा रहा है।
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए और किसी प्रकार की दुर्घटना होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी प्रशासन और परिवहन विभाग पर ही आएगी। अब जनता यही सवाल पूछ रही है कि क्या नियम-कानून केवल कागजों तक सीमित रहेंगे, या फिर बस संचालकों पर वास्तव में सख्त कार्रवाई होगी?
