फ्रांस। दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा के तत्वावधान में फ्रांस के मीर पुआ शहर में संत कबीरदास जी की जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ संत कबीरदास जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में पंडित शर्मा ने कहा कि संत कबीरदास जी ने सम्पूर्ण मानव समाज को प्रेम, सत्य, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व को संत कबीरदास जी के विचारों की आवश्यकता है। इस अवसर पर उन्होंने संत कबीरदास जी का प्रसिद्ध दोहा उद्धृत करते हुए कहा-
"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥"
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति दूसरों में दोष खोजने के बजाय स्वयं को सुधारने का प्रयास करे, तो समाज में वैमनस्य समाप्त होकर शांति, सद्भाव और विश्व बंधुत्व की स्थापना हो सकती है। संत कबीरदास जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय गोधिया मठ के मठाधीश स्वामी बुधयान जी महाराज ने अपने संदेश में संत कबीरदास जी को विश्व शांति, सामाजिक समरसता और मानव एकता का सबसे महत्वपूर्ण संत बताते हुए कहा कि कबीरदास जी के विचार सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने सभी से कबीरदास जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता ने किया। उन्होंने संत कबीरदास जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपराओं को विश्वभर में प्रसारित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का शिष्य मंडल, श्री मतंगेश्वर सेवा समिति के सदस्य, अर्हम ध्यान योग के सदस्य, हरे रामा हरे कृष्णा (इस्कॉन) के सदस्य, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सदस्य, भगवान रजनीश ओशो के अनुयायी, विश्व प्रसिद्ध लोक गायक एवं संगीतज्ञ रईस भारती तथा योग विशेषज्ञ कैथी सहित बड़ी संख्या में भारतीय एवं विदेशी श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विशेष रूप से फ्रांस, इटली, इंग्लैंड, आर्मेनिया तथा इज़राइल से पधारे संत कबीरदास जी के अनुयायियों एवं कबीर भक्तों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया और संत कबीरदास जी के सार्वभौमिक संदेश को विश्वभर में प्रसारित करने का संकल्प लिया।
अंत में सभी उपस्थितजनों ने संत कबीरदास जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता एवं विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प लिया।




