चेन्नई। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह के दौरान मंगलवार को दो अलग-अलग विवाद सामने आने से शैक्षणिक कार्यक्रम विवादों में घिर गया।कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा सीधे डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या सीमित किए जाने के फैसले और समारोह में गाए जाने वाले गीतों के क्रम को लेकर विवाद के कारण छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने समारोह का बहिष्कार कर दिया।
विश्वविद्यालय ने पहले घोषणा की थी कि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर 871 छात्रों को व्यक्तिगत रूप से डिग्रियां प्रदान करेंगे। कुल मिलाकर 37,877 विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह में डिग्रियां दी जानी थीं। हालांकि, कार्यक्रम शुरू होने से कुछ समय पहले विश्वविद्यालय ने संशोधित सूचना जारी कर बताया कि केवल 113 स्वर्ण पदक विजेता छात्रों को ही राज्यपाल के हाथों सीधे डिग्री मिलेगी। बाकी छात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रमाणपत्र वितरित किए जाएंगे।
इस अप्रत्याशित बदलाव से छात्रों और उनके परिजनों में नाराजगी फैल गई। कई परिवार राज्यपाल से सीधे डिग्री प्राप्त करने की उम्मीद लेकर विश्वविद्यालय पहुंचे थे।
कई छात्रों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पहले की घोषणा से उनकी उम्मीदें बढ़ गई थीं, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम में बदलाव किए जाने से उन्हें निराशा और भ्रम का सामना करना पड़ा।
करीब 45 मिनट की देरी से शुरू हुए समारोह पर गीतों के क्रम को लेकर प्रोटोकॉल संबंधी विवाद भी हावी रहा।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, सबसे पहले 'वंदे मातरम्' प्रस्तुत किया गया, जबकि राज्य वंदना गीत 'तमिल थाई वाऴ्थु' को तीसरे क्रम पर रखा गया था। इस क्रम पर उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि 'तमिल थाई वाऴ्थु' को 'वंदे मातरम्' के बाद रखना स्वीकार्य नहीं है।
मंत्री ने इसे अनुचित बताते हुए दीक्षांत समारोह का बहिष्कार कर दिया।
उनके समर्थन में तिरुनेलवेली से टीवीके विधायक मुरुगन और कडायनल्लूर से विधायक राजेंद्रन ने भी समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला किया। इस बहिष्कार ने विश्वविद्यालय के वार्षिक शैक्षणिक समारोह को राजनीतिक रंग दे दिया।
विवादों के बावजूद राज्यपाल की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। इस दौरान 113 स्वर्ण पदक विजेताओं को राज्यपाल ने डिग्रियां प्रदान कीं, जबकि अन्य विद्यार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनकी डिग्रियां वितरित की गईं।
हालांकि, डिग्री वितरण में बदलाव और समारोह के प्रोटोकॉल को लेकर हुए इन दोहरे विवादों ने पूरे कार्यक्रम पर असर डाला और हजारों स्नातक विद्यार्थियों की उपलब्धियां चर्चा से पीछे रह गईं।




