छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नाम तेजी से चर्चा में है जिसने भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक संपर्क अभियान को नई दिशा देने का काम किया है, यह नाम है सैयद काजी दिलशाद अली।


अल्पसंख्यक मोर्चा के सूफी संवाद प्रदेश प्रभारी के रूप में सैयद काजी दिलशाद अली ने जिस तरह सूफिज्म और अध्यात्म के माध्यम से मुस्लिम समाज के बीच संवाद स्थापित किया, उसने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जहां वर्षों तक मुस्लिम समाज के बीच BJP को लेकर दूरी और डर का माहौल बना रहा, वहीं सैयद काजी दिलशाद अली ने सीधे दरगाहों, खानकाहों और मजारों तक पहुंचकर भरोसे और संवाद की राजनीति को मजबूत किया।


माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मंत्र को लेकर BJP अल्पसंख्यक मोर्चा लगातार अल्पसंख्यक समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी साहब के मार्गदर्शन और सूफी संवाद राष्ट्रीय प्रभारी के निर्देश पर मध्यप्रदेश में सूफी संवाद अभियान शुरू किया गया, जिसकी जिम्मेदारी सैयद काजी दिलशाद अली को सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ प्रदेशभर में लगातार दौरे शुरू किए।


बताया जा रहा है कि इस अभियान के तहत लगभग 50 जिलों में पहुंचकर 55 हजार से 60 हजार लोगों तक सीधा संवाद स्थापित किया गया। खास बात यह रही कि यह अभियान केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक और सामाजिक जुड़ाव का माध्यम बन गया। सैयद काजी दिलशाद अली ने हर दरबार, हर खानकाह और हर मजार तक पहुंचकर वहां से जुड़े लोगों से मुलाकात की। उन्होंने केवल मुस्लिम समाज ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोगों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया।


दरगाहों पर चादरपोशी, खानकाहों में बैठकर चर्चा, सूफी संतों और खादिमों से मुलाकात तथा सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी इस अभियान की पहचान बन गई। बताया जाता है कि कई जगहों पर उन्होंने लोगों को BJP की योजनाओं और प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को बेहद सरल भाषा में समझाया। उनका मुख्य संदेश यही रहा कि BJP केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की राजनीति करने वाली पार्टी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्षों तक कांग्रेस की तुष्टिकरण राजनीति के कारण मुस्लिम समाज के बीच BJP को लेकर जो दूरी बनी रही, उसे सूफी संवाद अभियान ने काफी हद तक कम करने का प्रयास किया। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े और उन्होंने भरोसा जताया।


सैयद काजी दिलशाद अली की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी कार्यशैली को माना जा रहा है। वे केवल मंचीय राजनीति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सीधे लोगों के बीच जाकर संवाद बनाने में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि सूफी संगठनों और अल्पसंख्यक समाज के बीच उनकी अलग पहचान बनी है। अब राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि सैयद काजी दिलशाद अली का नाम मध्यप्रदेश अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। इसके पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी साहब का समर्थन प्राप्त है।


साथ ही विदिशा क्षेत्र के संगठनात्मक पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और प्रदेश स्तर के नेताओं का भी उनके प्रति सकारात्मक रुख बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश महामंत्री एवं कोर समिति सदस्य माननीय लता वानखेड़े जी द्वारा भी पत्र के माध्यम से उनके नाम की अनुशंसा किए जाने की चर्चा है। पार्टी के भीतर उनकी साफ छवि, ईमानदारी, संगठन के प्रति निष्ठा और लगातार सक्रियता को भी बड़ा कारण माना जा रहा है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सैयद काजी दिलशाद अली को अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी मिलती है, तो यह BJP की अल्पसंख्यक राजनीति में बड़ा संदेश माना जाएगा। क्योंकि अल्पसंख्यक आयोग केवल एक राजनीतिक पद नहीं, बल्कि समाज और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती है, तो वे शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति, सामाजिक योजनाओं और अल्पसंख्यक समाज की समस्याओं को मजबूती से उठाने का काम कर सकते हैं। फिलहाल, सूफी संवाद अभियान ने सैयद काजी दिलशाद अली को मध्यप्रदेश में BJP के सबसे चर्चित अल्पसंख्यक चेहरों में शामिल कर दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संगठन उन्हें आने वाले समय में कितनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपता है।