धार। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में धार की विवादित भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है, जिसके बाद पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई पूरी कर दो जजों की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस संवेदनशील फैसले के मद्देनजर इंदौर और धार जिला प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। शुक्रवार के दिन जुमे की नमाज होने के कारण परिसर की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बेहद पुख्ता कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने दोनों पक्षों से हर हाल में शांति और सौहार्द बनाए रखने तथा सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी या अफवाह साझा न करने की सख्त अपील की है।
विधायक रामेश्वर शर्मा बोले- सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता, यह सनातन की जीत है
धार भोजशाला मामले पर आए न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता और यह आज एक बार फिर साबित हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत के सनातन हिंदू धर्म पर लगातार मुगलों द्वारा आक्रमण किए गए, मंदिर तोड़े गए और वेद-पुराण जलाए गए, लेकिन हिंदू अपनी संस्कृति और हिंदुस्तान के लिए हमेशा लड़ता रहा। धार भोजशाला की लंबी लड़ाई का जिक्र करते हुए उन्होंने न्यायालय के प्रति आभार जताया और सनातन के लिए बलिदान देने वाले करोड़ों हिंदुओं को नमन किया। रामेश्वर शर्मा ने उम्मीद जताते हुए कहा कि मुस्लिम समाज भी इस सत्य को स्वीकार करेगा और मुगल लुटेरों द्वारा तोड़े गए सभी प्राचीन मंदिरों के स्मृति चिन्ह वापस सौंपकर हिंदुओं की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएगा।
याचिका और कानूनी सफर की पृष्ठभूमि
इस विवाद की कानूनी प्रक्रिया में तेजी साल 2022 में आई, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने, हिंदू समाज को नियमित पूजा-अर्चना का पूर्ण अधिकार देने, परिसर में नमाज पर रोक लगाने, एक स्वतंत्र ट्रस्ट का गठन करने और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। इसी मामले के अंतर्गत साल 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने परिसर का 98 दिनों तक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद, इसी वर्ष 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से 12 मई तक नियमित सुनवाई चली।
अदालत में दोनों पक्षों के तर्क
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और 'धार की भोजशाला' पुस्तक का हवाला देते हुए इसे राजा भोज द्वारा स्थापित मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र बताया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने राजा भोज के ग्रंथ 'समरांगण सूत्रधार' का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि भोजशाला की स्थापत्य संरचना पूरी तरह मंदिर निर्माण के मानकों से मेल खाती है। इसके विपरीत, मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने तर्क दिया कि यह परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है। उन्होंने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और उसकी वीडियोग्राफी की स्पष्टता पर सवाल उठाए और कहा कि अयोध्या मामले के विपरीत यहाँ वर्तमान में कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है।
वर्षों से चली आ रही व्यवस्था
ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, वर्ष 2003 से एएसआई के आदेशानुसार यहाँ एक विशेष व्यवस्था लागू है। इसके तहत हर मंगलवार और वसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा करने तथा प्रत्येक शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज अदा करने का अधिकार है, जबकि शेष दिनों में यह परिसर पर्यटकों के लिए खुला रहता है। पूर्व में साल 2013 और 2016 में वसंत पंचमी और शुक्रवार का दिन एक साथ आने पर यहाँ भारी तनाव की स्थिति निर्मित हो चुकी है। यही कारण है कि आज आने वाले इस फैसले को इस संवेदनशील और वर्षों पुराने विवाद की भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



