नई दिल्ली। निवेशकों के मजबूत रिस्पॉन्स से विदेशी मुद्रा प्रवाह में वृद्धि के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) (एफसीएनआर (बी)) जमा के लिए अपनी स्वैप सुविधा को निर्धारित समय से पहले समाप्त करने की घोषणा की।आरबीआई ने कहा कि अब यह स्वैप सुविधा केवल 31 अगस्त 2026 तक जुटाई गई एफसीएनआर (बी) जमा के लिए उपलब्ध होगी।
केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा, “एफसीएनआर (बी) जमा के लिए स्वैप सुविधा को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया और इसके परिणामस्वरूप हुए विदेशी मुद्रा प्रवाह को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि एफसीएनआर (बी) जमा के लिए स्वैप सुविधा केवल 31 अगस्त 2026 तक जुटाई गई जमा के लिए उपलब्ध होगी। इस सुविधा के तहत स्वैप यानी एफसीएनआर (बी) जमा का लाभ आरबीआई से 11 सितंबर 2026 तक लिया जा सकता है।”
इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने कहा था कि उसकी रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा के तहत जून में योजना शुरू होने के बाद से 40.816 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ है।
अधिकृत डीलर बैंकों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इसमें सबसे बड़ा योगदान एफसीएनआर (बी) जमा का रहा।
31 जुलाई तक इस सुविधा के तहत कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह 40.816 अरब डॉलर रहा। इसमें एफसीएनआर (बी) जमा का योगदान 36.725 अरब डॉलर, जबकि ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (ओएफसीबी) का योगदान 2.575 अरब डॉलर रहा। वहीं, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ईसीबी) के जरिए अतिरिक्त 1.516 अरब डॉलर आए।
आरबीआई ने कहा कि 8 जून 2026 से शुरू हुई इस स्वैप सुविधा को निवेशकों से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और इसके तहत लगातार विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार, आरबीआई की इस योजना के 30 सितंबर को समाप्त होने तक भारत को 65-70 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) जमा प्राप्त हो सकती है, जबकि कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह 80-85 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
इस बीच, 7 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.136 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया। इसमें फॉरेन करेंसी एसेट्स और सोने के भंडार का बड़ा योगदान रहा।




