नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनका दुरुपयोग होने की संभावना है। कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर कहा कि नए नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार किया जाए। CJI सूर्यकांत ने केंद्र से पूछा, “हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं ।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़ितों को न्याय से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता, लेकिन जनरल कैटेगरी की शिकायतों से अदालत की कोई चिंता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरक्षित समुदायों के लिए निवारण प्रणाली लागू रहनी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
UGC के नए नियमों का विरोध
मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने नए नियमों के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं। उनका आरोप था कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ समुदायों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है।
13 जनवरी को जारी किए गए नियमों का नाम है ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’। इसके तहत कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखती हैं।
हालांकि, जनरल कैटेगरी के छात्रों का कहना है कि नए नियम उन्हें ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना सकते हैं और इससे कॉलेजों में भेदभाव व अराजकता बढ़ सकती है।

