छतरपुर (बमीठा)। छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पीरा से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ आज शाम अचानक आए तेज आंधी-तूफान के कारण एक विशालकाय पेड़ गिरने से गुरुकुल संचालित करने वाले एक महात्मा की दर्दनाक मौत हो गई। घटना की आधिकारिक पुष्टि बमीठा थाना पुलिस द्वारा की गई है। इस दुखद हादसे में खास बात यह रही कि महात्मा ने अपनी जान की परवाह न करते हुए गुरुकुल के बच्चों को तो सुरक्षित बचा लिया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और वे स्वयं इस हादसे का शिकार हो गए। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।


तूफान की भनक लगते ही बच्चों को भेजा अंदर, खुद बने हादसे का शिकार

ग्राम वासियों से प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आज शाम करीब 6:00 बजे क्षेत्र में अचानक मौसम का मिजाज बदला और तेज हवाओं के साथ भयंकर आंधी-तूफान शुरू हो गया। जिस वक्त यह तूफान आया, उस समय पीरा ग्राम में स्थित गुरुकुल आश्रम के प्रांगण में एक भारी पेड़ के नीचे महात्मा अपने गुरुकुल के बच्चों के साथ बैठे हुए थे। जैसे ही महात्मा को तूफान की भयावहता की भनक लगी, उन्होंने तत्परता और सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत सभी बच्चों को दौड़कर आश्रम के भीतर सुरक्षित कमरों में जाने को कहा। बच्चे महात्मा की आज्ञा पाकर जैसे ही अंदर पहुंचे, वैसे ही महात्मा खुद भी वहां से सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए तैयार हुए। लेकिन तभी एक जोरदार झटके के साथ वह विशालकाय और भारी पेड़ जड़ से उखड़कर सीधे महात्मा के ऊपर आ गिरा। पेड़ का वजन इतना अधिक था कि उसके नीचे दबने से महात्मा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।


मौके पर पहुंची बमीठा पुलिस, क्षेत्र में पसरा मातम

आश्रम में चीख-पुकार मचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके की तरफ दौड़े और पेड़ के मलबे को हटाकर महात्मा को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की सूचना तत्काल बमीठा थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही बमीठा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच चुकी है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर शव को अपने कब्जे में ले लिया है और मर्ग कायम कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि महात्मा ने सही समय पर बच्चों को अंदर न भेजा होता, तो आज एक बहुत बड़ा और भयावह हादसा हो सकता था। बच्चों को जीवनदान देकर खुद मौत को गले लगाने वाले महात्मा के इस सर्वोच्च बलिदान की हर कोई सराहना कर रहा है। फिलहाल इस हृदयविदारक हादसे के बाद से पूरे पीरा गांव और गुरुकुल आश्रम में सन्नाटा पसरा हुआ है।