ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय स्लोवाकिया दौरे को लेकर जोरशोर से तैयारी चल रही है। इसको लेकर स्लोवाकिया में भारत की राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने आईएएनएस को बताया कि यह भारत के लिए यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (ईयू-एफटीए) के लिए गेटवे टू यूरोप हो सकता है। उन्होंने बातचीत के दौरान भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आर्थिक तकनीक को लेकर स्लोवाकिया के नजरिए को भी सामने रखा।उन्होंने कहा, "स्लोवाकिया मध्य यूरोप का महत्वपूर्ण देश है। अगर आप इसे जगह देते हैं, तो भारतीय कंपनियों के लिए यह गेटवे टू यूरोप की तरह भी महत्वपूर्ण है। यहां की तकनीक हमारे लिए बहुत जरूरी है। ईयू-एफटीए की वजह से संभावनाएं अपार हैं। सहयोग के लिए क्षेत्र खुल गए हैं।"

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और बढ़ती आर्थिक तकनीक को लेकर स्लोवाकिया के नजरिए पर भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने कहा, "स्लोवाकिया के मन में भारत के लिए बहुत ही ज्यादा सम्मान है और वो इस बात को स्वीकार करते हैं कि भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो हमारा बाजार और स्टार्टअप इकोनॉमी है, इसकी वजह से वो हमारे साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक हैं।"

हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि स्लोवाकिया ने दिसंबर 2025 में हिंद-प्रशांत में अपनी रणनीति को लॉन्च किया है। इसके तहत उन्होंने व्यापार, तकनीक और राजनीतिक संबंधों को बढ़ाने के लिए हिंद-प्रशांत को काफी महत्व दिया है। इसलिए भारत के लिए इस रणनीति में बड़ी भूमिका है।

उन्होंने बताया कि भारतीय समुदाय की स्लोवाकिया में पिछले दो-तीन सालों में काफी बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान समय में लगभग 11 हजार भारतीय यहां पर रह रहे हैं। 500 के करीब हमारे भारतीय छात्र हैं, जो अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं। यह हमारी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है और भारतीय खाना यहां काफी प्रसिद्ध हो गया है। यहां के विश्वविद्यालय में भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग करने में काफी रूचि है। इस बार जो घोषणाएं होंगी, उसमें संस्थागत सहयोग भी शामिल होने की उम्मीद है। भारतीय छात्र भी धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। इस तरह के सहयोग और भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय संस्कृति, योग और आयुर्वेद को लेकर उन्होंने कहा कि स्लोवाकिया में योग और आयुर्वेद का बहुत ज्यादा प्रचलन है। कुछ-कुछ दूरी पर आपको एक योग स्टूडियो मिलेगा। आयुर्वेद के लिए लोग भारत के केरल में जाते हैं। यहां उनकी अपनी वॉटर थेरेपी है और उसके साथ हम आयुर्वेद को जोड़कर काम कर रहे हैं। वैसे तो बहुत प्रचलन है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने की और भी बहुत संभावनाएं हैं।