फ्रांस। दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा के निर्देशन में दक्षिण फ्रांस के अरियाज राज्य के मीरपुआ स्थित भक्ति योगा सेंटर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं भारतीय परंपराओं के अनुरूप हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर फ्रांस, जापान, रूस, यूक्रेन, इटली, बेल्जियम सहित अनेक देशों से आए कृष्ण भक्तों ने सहभागिता कर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की।
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर परिसर में मंगल आरती, वैदिक मंत्रोच्चार, पंचामृत अभिषेक, शंखध्वनि एवं विधिवत पूजन-अर्चन के साथ कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। भगवान श्रीकृष्ण का मनमोहक श्रृंगार कर उन्हें नवीन वस्त्र, मुकुट, मयूर पंख एवं पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया। तत्पश्चात तुलसी दल, माखन-मिश्री, फल, पंचामृत एवं विविध व्यंजनों सहित छप्पन भोग अर्पित कर विश्व शांति, मानव कल्याण एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना की गई।
दिनभर भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन, श्रीकृष्ण लीला एवं भारतीय सांस्कृतिक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। विदेशी श्रद्धालुओं ने भी पूरे उत्साह के साथ भारतीय परंपराओं का पालन करते हुए भक्ति में सहभागिता की और "हरे कृष्ण" महामंत्र के संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
रात्रि 12 बजे, भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की पावन बेला में वैदिक विधि-विधान के साथ जन्माभिषेक संपन्न हुआ। शंख, घंटा, और ढोल-नगाड़ों की मंगलध्वनि के बीच भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया। जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म की घोषणा हुई, पूरा परिसर "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर आरती उतारी और भक्ति भाव से झूमते हुए आनंदोत्सव मनाया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बेल्जियम से पधारी भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना आशा कुमारी की मनोहारी प्रस्तुति रही। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से श्रीकृष्ण की बाल एवं रास लीलाओं का सजीव चित्रण कर सभी का मन मोह लिया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के विश्वविख्यात खजुराहो नृत्य समारोह (20 से 26 फरवरी) का उल्लेख करते हुए अंतरराष्ट्रीय कला प्रेमियों को खजुराहो आने का आमंत्रण भी दिया।
इस अवसर पर इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता, स्वामी मूर्ति जी एवं संन्यासी रेवती जी द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष छप्पन भोग प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस कार्यक्रम मे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज शिष्य मंडल, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री शिष्य मंडल, ब्रह्मकुमारी शिष्य मंडल एवं ओशो प्रेमियों ने भाग लिया | योग एवं आयुर्वेद विषय पर आयोजित विशेष सत्र में नटरानी दासी, राधा रानी दासी एवं योगिनी नारायणी जी ने भारतीय योग परंपरा, आयुर्वेद एवं आध्यात्मिक जीवन शैली के वैश्विक महत्व पर प्रेरणादायी उद्बोधन दिए।
समापन पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं एवं विश्व बंधुत्व के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। यह आयोजन भारतीय आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक एकता और वैश्विक सद्भाव का अनुपम उदाहरण बनकर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।




