नुवाकोट। नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के बाद लोगों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अब तक इस आपदा में 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि सब कुछ एक ही पल में बह गया और अभी तक कई मृतकों की पहचान भी नहीं हो सकी है।नुवाकोट में राहत और बचाव कार्य में जुटे एक स्वयंसेवक ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह करीब दो घंटे पहले काठमांडू से प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों का आकलन करने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल भोजन, पीने के पानी और रात में ठहरने की व्यवस्था सबसे बड़ी जरूरत है।

स्वयंसेवक ने कहा, "मुझे नहीं पता कि यह आपदा कैसे आई। सब कुछ एक ही झटके में बह गया। लोगों को बाढ़ की कोई चेतावनी नहीं मिली थी। किसी ने इतनी बड़ी तबाही की कल्पना भी नहीं की थी। यहां की मुख्य सड़क समेत 30 से 35 किलोमीटर का इलाका पूरी तरह बह गया है।"

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सांसद धनेंद्र कार्की ने बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र सिंधुली से ही 50 से 60 लोग अब तक लापता हैं।

उन्होंने कहा, "हम अभी तक उनका कोई पता नहीं लगा पाए हैं। अब फिर से जानकारी मिली है कि एक बांध टूट गया है। इसके बावजूद मैं आगे जाकर यह देखने की कोशिश करूंगा कि क्या मुझे अपने इलाके का कोई व्यक्ति मिलता है। मैं उनकी तलाश में यहां आया हूं।"

कार्की ने बताया कि नेपाल सरकार फिलहाल राहत और बचाव कार्यों के लिए 20 से 22 हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा, "अभी तक मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर कितने श्रद्धालु जा रहे थे और उनमें से कितनों की इस आपदा में मौत हुई है।"

नेपाली सांसद ने संकट के समय सहायता भेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार भी व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल की बहुत मदद की है। इस कठिन समय में नेपाल का साथ देने के लिए मैं भारत सरकार के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।"

नेपाल के पूर्व वित्त मंत्री बरषमान पुन ने भी भारत की सहायता की सराहना की। उन्होंने कहा, "एक सच्चे पड़ोसी की तरह प्रधानमंत्री मोदी का त्वरित समर्थन संदेश और भारत सरकार की राहत सहायता बेहद सराहनीय है। नेपाल की जनता और सभी राजनीतिक दलों की ओर से मैं भारत का धन्यवाद करता हूं।"

बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद कर रही संस्था कोरस इंटरनेशनल की मुख्य मानवीय अधिकारी तमारा डेमुरिया ने कहा कि तबाही का स्तर बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने बताया, "मैं नदी के किनारे-किनारे उत्तर दिशा तक नुकसान का जायजा लेने गई थी। जो दृश्य मैंने देखे, वे बेहद भयावह थे। कई घर पूरी तरह बह गए हैं, सोलर पैनल पानी में समा गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका खत्म हो गई है। फिलहाल हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं।"

इस बीच नेपाल ने एक नई बाढ़ की आशंका को लेकर भी चेतावनी जारी की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत सीमा के पास ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट के ऊपर स्थित एक अवरोधक झील का किनारा टूट गया है, जिससे फिर से बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है।

नेपाल पुलिस के अधिकारी पी. चौधरी ने आईएएनएस से कहा, "हमें सूचना मिली है कि चीन सीमा की ओर से आने वाले पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सामान्य अलर्ट जारी किया गया है। इसी कारण बचाव अभियान को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।"

नेपाल में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं, लेकिन लगातार बढ़ते खतरे और बड़ी संख्या में लापता लोगों के कारण स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है।