सागर | मध्य प्रदेश के सागर जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी (उपार्जन) में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही पर राज्य सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सागर के सहायक आपूर्ति अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है, वहीं जिला आपूर्ति नियंत्रक को उनके पद से हटाते हुए भोपाल मुख्यालय अटैच कर दिया गया है। मामला जिले के एक वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों में भारी मात्रा में मिट्टी मिलाए जाने से जुड़ा हुआ है।
लक्ष्मी नगर के वेयरहाउस में चल रहा था खेल, मंत्री के निर्देश पर गिरी गाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार (14 जून 2026) को सागर के गंभीरिया स्थित लक्ष्मी नगर के 'श्री देव प्रभाकर हाउस' (वेयरहाउस) में गेहूं खरीदी के दौरान गंभीर धांधली और किसानों के हितों से खिलवाड़ किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं।
बोरियों में मिली मिट्टी:
औचक निरीक्षण और शिकायतों की जांच में सामने आया कि वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों में अनाज के साथ भारी मात्रा में मिट्टी और कंकड़ मिलाए जा रहे थे। इस गंभीर घोटाले की सूचना मिलते ही खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया और सागर कलेक्टर को तत्काल दूरभाष पर कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों पर हुई निलंबन और तबादले की गाज
मंत्री राजपूत के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले में प्रथम दृष्टया घोर लापरवाही और संलिप्तता पाए जाने पर प्रशासन ने निम्नलिखित कार्रवाई की है: निशांत पांडे (सहायक आपूर्ति अधिकारी): इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
ज्योति बघेल (जिला आपूर्ति नियंत्रक): इन्हें सागर जिले के प्रभार से तत्काल हटा दिया गया है और आगामी आदेश तक भोपाल स्थित शासकीय मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, मिट्टी मिलाने के इस काले खेल में शामिल संबंधित स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों और वेयरहाउस प्रबंधन के खिलाफ भी पुलिस में आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज करा दिया गया है।
अन्य विभागों के दोषी कर्मचारी भी आएंगे लपेटे में, जांच के आदेश
खाद्य मंत्री ने सागर कलेक्टर को निर्देशित किया है कि इस घोटाले में केवल खाद्य विभाग ही नहीं, बल्कि उपार्जन प्रक्रिया से जुड़े अन्य सहयोगी विभागों (जैसे सहकारिता, मार्कफेड आदि) के जो भी कर्मचारी या नोडल अधिकारी शामिल हैं, उनकी भूमिका की भी विस्तृत जांच की जाए।
लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं:
"गेहूं खरीदी में हुई गड़बड़ी अत्यंत गंभीर और अक्षम्य अपराध है। किसानों की दिन-रात की मेहनत और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का कुठाराघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई संस्था, समूह, अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"
— गोविंद सिंह राजपूत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री, म.प्र.
पारदर्शी प्रशासन के लिए निगरानी तंत्र होगा और मजबूत
मंत्री राजपूत ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार किसानों को सशक्त बनाने, उनकी आय में वृद्धि करने और कृषि व्यवस्था को पारदर्शी रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसानों के विश्वास को ठेस पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में इस प्रकार के घोटालों और लापरवाही की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रदेश भर के उपार्जन केंद्रों पर निगरानी और औचक निरीक्षण की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व मजबूत किया जाएगा। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से प्रदेश के अन्य जिलों के उपार्जन केंद्रों पर भी हड़कंप का माहौल है।

