चंदला, जितेंद्र तिवारी। "तुम्हें जहां शिकायत करनी है कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता!"—यह किसी दबंग की धमकी नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक कर्मचारी का अहंकार है, जिसने ग्राम पंचायत सढ़कर के दर्जनों गरीब परिवारों की नींद उड़ा दी है।
मंगलवार को जब लवकुशनगर जनपद कार्यालय में जनसुनवाई चल रही थी, तभी चंदला क्षेत्र के ग्राम सढ़कर से आए आक्रोशित ग्रामीणों के एक जत्थे ने पहुँचकर अपनी पीड़ा रखी। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि ग्राम पंचायत के रोज़गार सहायक (सचिव) जगदीश शुक्ला की मनमानी और दबंगई के चलते प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची से चुपके से उनके नाम गायब कर दिए गए हैं।
सत्यापन और जियो-टैगिंग के बाद भी काटे नाम
जनसुनवाई में जाने से पहले ग्रामीणों ने चंदला के सर्किट हाउस चौराहे पर एकत्र होकर अपनी आपबीती पत्रकारों को सुनाई। पीड़ितों ने बताया कि वे बीपीएल कार्डधारक हैं और उन्हें 'लाड़ली बहना' सहित अन्य शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उनके कच्चे मकानों का पूर्व में भौतिक सत्यापन और जियो-टैगिंग तक हो चुकी है।
इसके बावजूद रोज़गार सहायक जगदीश शुक्ला ने मनमाने तरीके से पात्र और बेहद ज़रूरतमंद परिवारों को अपात्र घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रसूखदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से गरीब और बेघर परिवारों के हक पर कैंची चलाई जा रही है।
सवाल पूछने पर मिली धमकी
पीड़ित ग्रामीण नीलकंठ वाजपेयी और द्रौपदी सिंह ने बताया, "जब हम रोज़गार सहायक से नाम काटे जाने की वजह पूछने गए, तो सांत्वना देने के बजाय उसने धमकी भरे लहजे में कहा कि जहाँ शिकायत करनी हो कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। हमें ग्राम पंचायत सरपंच से कोई शिकायत नहीं है, भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की असली जड़ यही रोज़गार सहायक है।"
जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार
महिलाओं और बुजुर्गों समेत दर्जनों ग्रामीणों ने पहले चंदला सर्किट हाउस चौराहे पर विरोध जताया और फिर लवकुशनगर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से माँग की है कि: निरंकुश हो चुके रोज़गार सहायक के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए। पीएम आवास योजना की सूची में हुई धांधली की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। पात्र एवं बेघर गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास का हक दिलाया जाए।
अब देखना यह होगा कि जनसुनवाई के बाद जिला व जनपद प्रशासन इस पर क्या कड़ा रुख अपनाता है या फिर गरीबों की यह गुहार सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह जाएगी।




