सतना, अंबिका केसरी। जिले की सोहावल जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गुलुआ में विकास कार्यों के नाम पर शासकीय राशि के आहरण और गबन का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार, शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और अभद्रता से आहत ग्रामीणों ने अब मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव और उनके पतियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
कागजों पर सिमटे विकास कार्य, राशि का फर्जी आहरण
ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत सचिव मालती पाण्डेय व उनके पति नवल किशोर पाण्डेय तथा सरपंच सीमा प्रजापति व उनके पति संजय प्रजापति पर आरोप है कि इन्होंने आपसी साठगांठ से शासकीय धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।
आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में रोड, नाली, पुलिया निर्माण, 'विकसित भारत' कार्यक्रम के दौरान टेंट का किराया और नाली सफाई के नाम पर फर्जी तरीके से शासकीय राशि निकाल ली गई। ग्रामीणों का दावा है कि ये तमाम निर्माण कार्य धरातल पर शून्य हैं और राशि का उपयोग केवल कागजी दस्तावेजों में दर्ज दिखाकर गबन कर लिया गया। इसके अलावा, सरपंच पर शासकीय भूमि पर अवैधानिक तरीके से पक्का घर बनाकर अवैध कब्जा करने का भी गंभीर आरोप है।
ग्राम सभा में हिसाब मांगने पर दी गालियां और धमकी
ग्रामवासियों ने बताया कि 15 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे आयोजित ग्राम सभा की बैठक के दौरान जब ग्रामीणों ने पंचायत में हुए विकास कार्यों और निकाली गई राशि का हिसाब मांगा, तो जिम्मेदार सही जानकारी देने के बजाय भड़क उठे। आरोप है कि आरोपियों ने ग्रामीणों के साथ अभद्रता करते हुए मां-बहन की गालियां दीं और जान से मारने की धमकी तक दे डाली।
पुलिस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में आक्रोश
ग्राम सभा में हुई इस अभद्रता और धमकी के खिलाफ ग्रामीणों ने तत्काल थाना कोठी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते कोठी पुलिस द्वारा अब तक आरोपियों पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन के उदासीन रवैये से नाराज ग्रामीणों ने आखिरकार कलेक्टर की चौखट पर पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत गुलुआ में हुए इस वित्तीय गबन और शासकीय भूमि पर कब्जे की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि दोषी पदाधिकारियों, कर्मचारियों व उनके सहयोगियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके।




