चँदला, जितेंद्र तिवारी। शासकीय प्राथमिक शाला सिलगाँव में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'मध्याह्न भोजन' (Mid-Day Meal) में बड़ी लापरवाही और अनियमितता का मामला सामने आया है। शासन के स्पष्ट निर्देशों और तय मेनू के बावजूद मासूम बच्चों को विशेष और पौष्टिक भोजन नसीब नहीं हो पा रहा है।


बच्चों की जुबानी, व्यवस्था की पोल खोलती सच्चाई

विद्यालय के छात्रों से जब उनके दैनिक मध्याह्न भोजन के बारे में बात की गई, तो उन्होंने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। बच्चों ने बताया कि मंगलवार जैसे विशेष दिनों में, जब मेनू के अनुसार खीर-पूड़ी या पूरी-सब्जी बननी चाहिए, तब भी उन्हें केवल दाल-चावल ही परोसा जा रहा है।


छात्रों का कहना है कि जब पूर्व में शिक्षक या आचार्य जी उपस्थित रहते थे, तब कभी-कभार पूरी-सब्जी बन जाती थी, लेकिन अब तो केवल रस्म अदायगी के तौर पर रोजाना दाल-चावल ही थमा दिया जाता है।


अभिभावकों और स्थानीय लोगों में आक्रोश

शासकीय प्राथमिक शाला सिलगाँव की इस लचर व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी असंतोष है। उनका आरोप है कि बच्चों के पोषण और स्वादिष्ट भोजन के नाम पर आने वाले बजट का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूँदे बैठे हैं।


ग्रामीणों ने सीधे सवाल उठाए हैं कि

  • शासन द्वारा निर्धारित भोजन मेनू का पालन सिलगाँव प्राथमिक शाला में क्यों नहीं किया जा रहा?
  • बच्चों के हक का पौष्टिक भोजन मार कर कौन खिलवाड़ कर रहा है?


जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग और प्रशासनिक वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई है कि सिलगाँव प्राथमिक स्कूल के मध्याह्न भोजन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषियों पर कार्रवाई करते हुए बच्चों को तय मेनू के अनुसार खीर-पूड़ी व अन्य पौष्टिक भोजन नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए।