छतरपुर, संजय अवस्थी/संदीप यादव। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छतरपुर में युवाओं का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। शहर के पन्ना नाका स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर आयोजित धरने में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालकर प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए धरना स्थल और कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा।


धरना दे रहे देवीदीन अहिरवार ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है और सरकार इसमें सुधार करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में भ्रष्टाचार बढ़ा है और यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर में इसी तरह के आंदोलन जारी रहेंगे।


डॉ. एमएल वर्मा ने कहा कि यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार हुआ तथा कई छात्रों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें प्रताडि़त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को देश का भविष्य बताती है, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई गंभीर पहल नहीं कर रही है।


महिला मोर्चा ओबीसी महासभा की अध्यक्ष राजलक्ष्मी कुशवाहा ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। वहीं सतेन्द्र शर्मा ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ कथित अभद्रता और लाठीचार्ज के विरोध में छतरपुर में प्रदर्शन किए जाने की बात कही।


रैली के दौरान जब प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें अंदर जाने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढऩे की कोशिश की, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।