हैदराबाद, रोहित पाठक। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सकारात्मक सोच ही सफलता की पहली सीढ़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जैसा हमारा विचार होगा, वैसा ही हमारा जीवन और परिणाम भी होगा। वे हैदराबाद के डीआरएस इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित प्रेरणादायी संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। वर्तमान में वे दक्षिण भारत प्रवास के दौरान तीन दिवसीय श्री हनुमंत कथा एवं दिव्य दरबार में शामिल होने हैदराबाद पहुंचे हैं।
विद्यालय परिसर में डीआरएस परिवार ने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का भव्य स्वागत किया। छात्र-छात्राओं ने पुष्पवर्षा, स्वागत नृत्य और उनका स्केच भेंट कर सम्मान व्यक्त किया। विद्यालय के चेयरमैन, डायरेक्टर और प्रधानाचार्य ने उन्हें पुष्पमाला एवं स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान बागेश्वर सरकार ने विद्यालय परिसर में स्थापित शिलापट्ट का भी अनावरण किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें और आत्मविश्वास के साथ उसे प्राप्त करने का प्रयास करें। उन्होंने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि जब उनके विद्यालय में कोई अतिथि आता था, तब वे भी उसी उत्साह के साथ स्वागत के लिए खड़े रहते थे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम अपने घर की हर वस्तु को व्यवस्थित रखते हैं, उसी प्रकार अपने मन को भी सकारात्मक दिशा में रखना चाहिए।
बागेश्वर महाराज ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि आज के समय में मोबाइल विद्यार्थियों का सबसे बड़ा शत्रु बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार ही मोबाइल का उपयोग करें, क्योंकि इसका अधिक प्रयोग समय की बर्बादी के साथ मन, मस्तिष्क और आंखों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई, खेलकूद, विश्राम और परिवार के लिए समय का संतुलित उपयोग करने का आग्रह किया तथा सभी को कम से कम मोबाइल उपयोग करने का संकल्प भी दिलाया।
अपने संबोधन के अंत में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीहनुमान के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि विद्यार्थी अनुशासन, सेवा, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो एक दिन उनका नाम ही उनके परिवार की सबसे बड़ी पहचान बनेगा। विद्यालय परिवार और विद्यार्थियों ने उनके प्रेरक उद्बोधन को उत्साहपूर्वक सुना और उनके संदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।




