भोपाल, जीतेन्द्र यादव। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद मामला राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। एक ओर राज्य सरकार इस विषय पर सावधानीपूर्वक अध्ययन के बाद निर्णय लेने की बात कह रही है, वहीं विपक्षी कांग्रेस ने इसे जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।


सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने प्रस्ताव पारित किया है, लेकिन अंतिम निर्णय राज्य शासन द्वारा सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण करने के बाद ही लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह विश्वविद्यालय की स्वायत्त प्रक्रिया का हिस्सा है और प्रस्ताव प्राप्त होने पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।


वहीं कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि नाम बदलने की राजनीति के माध्यम से महंगाई, किसानों की समस्याएं, युवाओं की बेरोजगारी, NEET पेपर लीक और विश्वविद्यालयों में कथित अनियमितताओं जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि संस्थानों के नाम बदलने पर।


नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में शासन स्तर पर होने वाले निर्णय और उस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और गर्मा सकती हैं। फिलहाल प्रदेश में विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।