भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का पुनरुद्धार और विभिन्न किसान-केंद्रित पहलों के माध्यम से किसानों की आत्महत्याओं की रोकथाम को अपने पहले दो वर्षों के कार्यकाल की दो सबसे बड़ी उपलब्धियों के रूप में बताया।
मुख्यमंत्री ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में नियमित सुनवाई से विभिन्न जन समस्याओं का सफल समाधान संभव हुआ है।
इसी प्रकार, भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने समृद्ध कृषक योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से और प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री-किसान योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करके कृषि क्षेत्र को मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने किसानों की आजीविका में सुधार किया है, जिससे राज्य में संकटग्रस्त आत्महत्याओं को रोका जा सका है।
माझी ने कहा कि उनकी दो सबसे बड़ी चुनौतियां युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करना और अल नीनो जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे का मुकाबला करना होंगी।
उन्होंने आगे कहा कि उनके प्रशासन ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोरलेंस की नीति अपनाई है। चिट फंड घोटालों का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि सरकार ने आरोपियों की संपत्तियों की नीलामी शुरू कर दी है और वैध रसीदें प्रस्तुत करने वाले वास्तविक जमाकर्ताओं को धन वापस करने के लिए कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के वरिष्ठ नागरिकों को मासिक पेंशन मिल रही है। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
उत्तर ओडिशा विकास परिषद, दक्षिण ओडिशा विकास परिषद और पश्चिमी ओडिशा विकास परिषद को लेकर उठाई गई चिंताओं को संबोधित करते हुए माझी ने कहा कि उनकी सरकार संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि उत्तरी ओडिशा विकास परिषद के लिए 200 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ एक कार्यबल का गठन किया गया है, जबकि पश्चिमी ओडिशा विकास परिषद के तहत विकास गतिविधियां जारी हैं। माझी ने स्वीकार किया कि विभिन्न जिलों की परस्पर विरोधी मांगों के कारण संबलपुर में पश्चिमी ओडिशा विकास परिषद मुख्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव विलंबित हुआ है।

