नई दिल्ली। सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड (एनटीपीसी) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विश्लेषकों के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट) सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 53.4 अरब रुपए (करीब 5,340 करोड़ रुपए) हो गया। यह आंकड़ा बाजार के औसत अनुमान 48 अरब रुपये (करीब 4,800 करोड़ रुपए) से अधिक रहा।रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सबसे बड़े बिजली उत्पादक को भीषण गर्मी के दौरान बिजली की रिकॉर्ड मांग का फायदा मिला। देश के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने से बिजली की खपत में तेज वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती मिली।

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान एनटीपीसी की बिजली बिक्री (इलेक्ट्रिसिटी सेल्स वॉल्यूम) में सालाना आधार पर करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी अवधि में कंपनी का राजस्व (रेवेन्यू) भी लगभग 3 प्रतिशत बढ़ा।

तिमाही के दौरान कंपनी ने 196 मेगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी। हालांकि, सितंबर 2025 में 440 मेगावाट क्षमता वाले कोयला आधारित बिजली संयंत्र को स्थायी रूप से बंद किए जाने के कारण सालाना आधार पर उसकी शुद्ध क्षमता वृद्धि (नेट कैपेसिटी एडिशन) कम रही।

बिजली की बढ़ती मांग का असर कंपनी के कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के प्रदर्शन पर भी दिखा। एनटीपीसी के थर्मल पावर प्लांट्स का प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) बढ़कर 76.7 प्रतिशत हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 75.2 प्रतिशत था।

बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का उपयोग (यूटिलाइजेशन) भी इस तिमाही में करीब 3 प्रतिशत प्वाइंट्स बढ़ा। खासतौर पर शाम के समय, जब सौर ऊर्जा उत्पादन कम हो जाता है, तब बिजली की मांग अधिक रहने से इन संयंत्रों का उपयोग बढ़ा।

फिलहाल एनटीपीसी की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता में कोयला और प्राकृतिक गैस आधारित संयंत्रों की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है, जिसमें संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) भी शामिल हैं।

इसके साथ ही कंपनी अपनी नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) क्षमता का लगातार विस्तार कर रही है। ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत एनटीपीसी ने परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर पावर) क्षमता बढ़ाने की भी योजना बनाई है।